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लखनादौन पेयजल ज़हरकांड ,कब जागेगा प्रशासन, कब होगी सख्त कार्रवाई , सवालों के घेरे में अधिकारीयों में बढ़ा जनदबाव.

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तबाही का पानी: लखनादौन में एक्सपायर क्लोरीन से जहर घोला गया, क्या जागेंगी कलेक्टर-संस्कृति जैन 

लखनादौन //उग्र प्रभा 
रिपोर्ट - अरविंद परवारी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग लखनादौन उपखण्ड अधिकारीयों पर कब होगी  कार्यवाही 

लखनादौन में लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एक्सपायर क्लोरीन को हैंडपंपों और पेयजल में मिलाकर लोगों की ज़िंदगी से जो खिलवाड़ किया गया है, वह न केवल एक तकनीकी चूक है बल्कि एक आपराधिक लापरवाही है जो सीधे-सीधे सिवनी जिले के प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है, इस घटना के बाद जहां जनता में भय, आक्रोश और अविश्वास की लहर है वहीं विभागीय अधिकारी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, न कोई निलंबन हुआ, न कोई गिरफ्तारी, और न ही कोई सख्त जांच का एलान, सवाल ये है कि एक्सपायर क्लोरीन जैसे जहरीले रसायन का इस्तेमाल आखिर कैसे हुआ, किसने मंजूरी दी, स्टोर में रखे रासायनिक पदार्थों की निगरानी कौन करता है, चाबी किसके पास थी, और सबसे बड़ी बात – इसके उपयोग की अनुमति किसने दी, सबइंजीनियर संदीप राठौर का गैरजिम्मेदाराना बयान कि “हमें जो मिला, वो डलवा दिया” ये साफ करता है कि विभाग में न कोई प्रक्रिया है, न प्रशिक्षण, और न ही मानव जीवन के प्रति संवेदनशीलता, क्या इतने बड़े स्तर की लापरवाही को सिर्फ एक व्यक्ति की गलती बताकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बच सकता है, अब तक सिवनी कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन की ओर से कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है, न ही कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई, न ही किसी दोषी अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए गए, ऐसे में सवाल उठता है – क्या जिला प्रशासन विभागीय अधिकारियों के दबाव में है, या फिर जिम्मेदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जनता अब चुप नहीं है, अब जनता जवाब मांग रही है, और ये दबाव सिर्फ सोशल मीडिया या अखबारों तक सीमित नहीं रहा, स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि, समाजसेवी संगठन, पत्रकार और आम नागरिक अब एकजुट होकर मांग कर रहे हैं कि इस मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच हो, दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज हो, तत्काल निलंबन और गिरफ्तारी की जाए, और पूरे जिले में जल स्त्रोतों की स्वास्थ्य जांच की जाए, कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे जिले की सर्वोच्च प्रशासकीय अधिकारी हैं, और यह उनकी जिम्मेदारी है कि नागरिकों के जीवन की रक्षा करें, यदि वे अब भी चुप रहीं, या मामले को दबाने की कोशिश हुई, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक विफलता मानी जाएगी बल्कि यह आमजन के अधिकारों का खुला उल्लंघन होगा, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक, सांसद और राज्य सरकार से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख की मांग हो रही है, क्या वे विभाग के अधिकारियों को बचा रहे हैं, या फिर वे भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ बयानबाज़ी कर रहे हैं, अब वक्त आ गया है कि जनता यह तय करे कि ऐसे अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जो सिर्फ वेतन लेने आए हैं, ज़िम्मेदारी निभाने नहीं, लखनादौन की जनता अब जाग चुकी है और यह मामला अब केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि जन श आंदोलन का कारण बन सकता है, यदि प्रशासन और शासन ने इस पर तुरंत और कठोर कदम नहीं उठाए तो जनता सड़कों पर उतरकर जवाब मांगने को मजबूर होगी, और फिर यह मामला पूरे प्रदेश में प्रशासन की नाकामी की मिसाल बन जाएगा, अधिकारी अगर सोचते हैं कि यह मामला धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा तो वे बड़ी भूल कर रहे हैं क्योंकि अब सवाल सिर्फ लखनादौन का नहीं, पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।

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