मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
उच्च शिक्षा भाग्योदय का पथ प्रशस्त करती है: प्रो. राव
"उच्च शिक्षा अदने आदमी को महामानव बना सकती है": प्रो. अमर सिंह
उच्च शिक्षा आत्मोत्कर्ष प्राप्ति की आधारशिला है": प्रो. कलमधार
उग्र प्रभा समाचार चांद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में 'उच्च शिक्षा से गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रबंधन' विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य अतिथि बतौर बोलते हुए प्रो. ए. एन. के. राव ने कहा कि उच्च शिक्षा भाग्योदय का पथ-प्रशस्त कर मन, बुद्धि और चित्त का संयमन करती है। किसी भी छात्र के लिए यह वही सही वक्त होता है, जब भविष्य में समृद्धि की फसल काटने के लिए उत्कृष्ट वैचारिक निवेश का बीजारोपण किया जा सकता है। प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा ऊर्जा के रचनात्मक कामों को अमलीजामा पहनाने हेतु अपेक्षित सदाचरण निर्माण का जरिया बनती है। उच्च शिक्षा अंतर्निहित संभावनाओं को स्वाभाविक तरीके से अदने से आदमी को महामानव बनने की मिसाल पेश करती है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. विजय कलमधार ने कहा कि उच्च शिक्षा आत्मविश्वास के आत्मोत्कर्ष से भावी सफलताओं की आधारशिला होती है। उच्च शिक्षा बौद्धिक रश्मियों से अभावों को संपन्नता के रंग से भरती है। प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि उच्च शिक्षा बंधनों की जकड़न से निजात दिलाकर पात्रता बुद्धि को परिष्कृत करती है। प्रो. राजेश कहार ने कहा कि उच्च शिक्षा शिक्षित एक छात्र अपनी कई पीढ़ियों की गरीबी को एक साथ दूर कर सकता है।
प्रो. चंद्रशेखर उसरेठे ने कहा कि उच्च शिक्षा अन्वेषणात्मक, समालोचनात्मक, और विश्लेषणात्मक चिंतन को व्यापक बनाकर दृष्टिकोण में एक चमत्कारी परिवर्तन करती है। प्रो. जागृति कावड़े ने कहा कि उच्च शिक्षा सर्वोत्कृष्ट विचार, विकसित व्यावहारिक ज्ञान और शोधपरक दृष्टि निर्माण करती है। प्रो. सुदीश सूर्यवंशी ने कहा कि उच्च शिक्षा सर्वसमावेशी आधारित समानता, नवाचार, और आर्थिक नेतृत्व सिखाती है। प्रो . लक्ष्मण उइके ने कहा कि उच्च शिक्षा जीवन में सर्वोच्च शिखर पर आसीन करने के लिए दक्षता निर्माण, सामाजिक, और नैतिक मूल्यों की स्थापना करती है। प्रो. आर. के. पहाड़े ने कहा कि उच्च शिक्षा व्यक्तिगत विकास, सामूहिक जिम्मेदारी, व्यावसायिक तैयारी और राष्ट्रहित में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए नागरिक को गढ़ती है। प्रो. सुरेखा तेलकर ने उच्च शिक्षा को चरित्र निर्माण, प्रो. रक्षा उपश्याम ने उच्च शिक्षा को सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, और संतोष अमोडिया ने उच्च शिक्षा को वैश्विक एकीकरण की दिशा में उल्लेखनीय भूमिका अदा करने जरिया बताया।

