वतन की खुशहाली के लिए एकजुटता जरूरी :एस.आर.शेंडे
छिंदवाड़ा //उग्र प्रभा
स्वाधीनता दिवस हमें वीर शहीदों के त्याग और संघर्ष की याद दिलाता है : एस.आर. शेंडे
भोपाल। 15 अगस्त का स्वाधीनता दिवस हमें उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने मातृभूमि की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खान, राम प्रसाद बिस्मिल, बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी लक्ष्मीबाई, शौकत उस्मानी सहित लाखों वीरों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनके बलिदान के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में निर्भय होकर सांस ले रहे हैं।सिविल राइट्स प्रोटेक्शन सेल मध्यप्रदेश के अध्यक्ष एवं साहित्यकार एस.आर. शेंडे ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद 26 जनवरी 1950 से लागू संविधान ने समता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय के मूल्यों पर आधारित लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की नींव रखी। इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के चलते भारत निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के 79 वर्षों बाद भी देश के सामने अनेक गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। साम्प्रदायिकता, धर्मांधता, जातीय भेदभाव, सामाजिक एवं आर्थिक विषमता, अंधश्रद्धा, महिलाओं और कमजोर वर्गों पर अत्याचार, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, गरीबी तथा महंगाई जैसी समस्याएं आज भी चिंता का विषय हैं। ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति में अभी और सुधार की आवश्यकता है।शेंडे ने कहा कि युवा, किसान और दस्तकार देश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए ठोस नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती को देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक बताया।उन्होंने प्रसिद्ध लेखक हरिशंकर परसाई के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में नफरत और विभाजन की प्रवृत्तियों से सावधान रहना होगा। देश की एकता, अखंडता और भाईचारे को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।शेंडे ने प्रसिद्ध शायर मोहम्मद इकबाल की पंक्तियों “सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा” का स्मरण करते हुए देशवासियों से आह्वान किया कि वे आपसी द्वेष मिटाकर समतामूलक विचारों को अपनाएं, पुरखों की विरासत और नई पीढ़ी का सम्मान करें तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दें।उन्होंने कहा कि “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” की भावना को मजबूत करते हुए हमें ऐसा भारत बनाने का संकल्प लेना चाहिए, जहां हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान, न्याय और सुरक्षा प्राप्त हो।
अंत में उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया—
“लहू से सींची वतन की मिट्टी,
जन-गण का अभिमान तिरंगा।
आओ इसे हर घर पर लहराएं,
सारे जहां से महान तिरंगा।”
