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मसाला खेती में छिंदवाड़ा ने रचा नया अध्याय, कालीमिर्च-तेजपत्ता-इलायची की सफल खेती से किसानों को नई उम्मीद

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 मसाला खेती में छिंदवाड़ा ने रचा नया अध्याय, कालीमिर्च-तेजपत्ता-इलायची की सफल खेती से किसानों को नई उम्मीद 


छिंदवाड़ा //उग्र प्रभा 

जिले में उद्यानिकी विभाग की नवाचार पहल अब रंग लाने लगी है। जिले की जलवायु और मिट्टी में मसाला फसलों की अपार संभावनाओं को देखते हुए शुरू किए गए प्रयासों के परिणाम अब सामने आने लगे हैं। कालीमिर्च, तेजपत्ता एवं छोटी हरी इलायची जैसे मूल्यवान मसाला पौधों की सफल खेती किसानों के लिए आय का नया रास्ता खोल रही है।

तत्कालीन कलेक्टर श्री शैलेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में उद्यानिकी विभाग छिंदवाड़ा द्वारा मसाला खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष पहल की गई थी। इसके अंतर्गत कर्नाटक राज्य के शिवमोग्गा से लौंग एवं कालीमिर्च के पौधे तथा असम राज्य के बामुनगांव से तेजपत्ता के पौधे प्राप्त कर जिले की शासकीय रोपणियों के माध्यम से कृषकों को प्रोत्साहित किया गया।


जिले की बरदिया (अमरवाड़ा), तेंदनी (हरई) एवं देलाखारी (तामिया) रोपणियों में कुल 5 हेक्टेयर क्षेत्र में मनरेगा की सामुदायिक फलोद्यान योजना के माध्यम से मसाला पौधों का रोपण किया गया। इसमें तेजपत्ता 1.500 हेक्टेयर, कालीमिर्च 1.500 हेक्टेयर, लौंग 1.500 हेक्टेयर तथा छोटी हरी इलायची 0.500 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई। 


वर्तमान में इन पौधों में तेजपत्ता, छोटी हरी इलायची और कालीमिर्च के पौधे बेहतर वृद्धि कर रहे हैं। पौधों में अच्छी बढ़वार दिखाई दे रही है, जिससे आने वाले समय में उत्पादन और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ गई है।

छिंदवाड़ा की धरती पर दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत की मसाला फसलें अब नई पहचान बना रही हैं। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ जिले में कृषि विविधीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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