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सहायक आयुक्त सेवानिवृत्त विदाई समारोह में युवक नें बेशर्म के गुलदस्ता भेंटकर कहा ऐसा भ्रष्ट अधिकारी दोबारा ना आए

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  जबलपुर में विदाई समारोह बना विरोध का मंच: छात्र ने गुलदस्ते की जगह भेंट किए 'बेशर्म के फूल', लगाए गंभीर आरोप  


जबलपुर //उग्र प्रभा 

मध्य प्रदेश के जबलपुर में जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सी. के. दुबे के सेवानिवृत्ति समारोह के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे कार्यक्रम का माहौल बदल दिया। जहां एक ओर विभागीय अधिकारी और कर्मचारी उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई देने के लिए एकत्रित हुए थे, वहीं दूसरी ओर एक छात्र ने मंच पर पहुंचकर उन्हें गुलदस्ता देने के बजाय 'बेशर्म के फूल' भेंट कर अपना विरोध दर्ज कराया।

घटना के दौरान मौजूद लोगों के अनुसार छात्र ने खुले मंच से कहा कि यह कदम किसी व्यक्तिगत दुर्भावना के कारण नहीं, बल्कि उन जनजातीय विद्यार्थियों की पीड़ा और आक्रोश को व्यक्त करने के लिए उठाया गया है जो वर्षों से छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना कर रहे हैं।

छात्र ने आरोप लगाया कि अधिकारी के कार्यकाल में आदिवासी छात्रावासों की स्थिति लगातार खराब होती गई, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए। छात्रों का कहना है कि कई छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता, पेयजल, स्वच्छता, रखरखाव और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।

विरोध कर रहे छात्रों ने कहा कि "ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को सम्मानित करने के बजाय उनके कार्यों का मूल्यांकन होना चाहिए। जो अधिकारी छात्रों का निवाला खाकर जनजातीय विद्यार्थियों का भविष्य अधर में छोड़ दें, उनके लिए सम्मान के फूल नहीं बल्कि बेशर्म के फूल ही उचित हैं।"

छात्रों ने आगे कहा कि उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से 'बेशर्म के फूल' इसलिए भेंट किए ताकि यह संदेश आने वाले अधिकारियों तक पहुंचे कि यदि वे अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारी और संवेदनशीलता से नहीं करेंगे तो जनता और छात्र समुदाय उनके कार्यकाल का हिसाब अवश्य मांगेगा।

छात्रों का आरोप है कि जनजातीय छात्रों के नाम पर शासन द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ, जिससे छात्रों में लंबे समय से असंतोष व्याप्त था।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के बीच यह घटना चर्चा का विषय बन गई। कुछ लोगों ने इसे युवाओं की बढ़ती जागरूकता और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बताया, जबकि कुछ ने इसे प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न के रूप में देखा।

छात्रों ने स्पष्ट कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें गरीब, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के अधिकारों और सुविधाओं की अनदेखी होती है। उनका कहना है कि जब तक छात्रावासों की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे विरोध जारी रहेंगे।

यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुकी है और जनजातीय छात्रावासों की स्थिति, विभागीय कार्यप्रणाली तथा प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। वहीं संबंधित आरोपों पर विभागीय पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

(नोट: समाचार में व्यक्त भ्रष्टाचार एवं अन्य आरोप छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)

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