मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
भविष्य या तो हरा होगा, या होगा ही नहीं": प्रो. अमर सिंह
संतुष्टि प्रकृति की दौलत है, लिप्सा दानवीय प्रवृत्ति": प्रो. अमर सिंह
उग्र प्रभा समाचार ,चाँद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में पर्यावरण शिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत सतत जीवन शैली को समृद्ध करने हेतु इको क्लब द्वारा विश्व पृथ्वी दिवस पर धरती बचाओ विश्व बचाओ विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि भविष्य या तो हरा होगा या होगा ही नहीं। संतुष्टि प्रकृति की दौलत है, लिप्सा दानवीय प्रवृत्ति। अगर आदमी उड़ सकता तो आसमान को भी नष्ट कर देता। जंगल जमीन के फेफड़े हैं जो हवा को शुद्ध करते हैं। प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि मानव की वे असंतुलित गतिविधियां जो पर्यावरण में खतरनाक परिवर्तन लाती हैं, उसे पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। मानव विकास की अंधी दौड़ में जंगलों की अंधाधुंध कटाई, औद्योगीकरण के कारण कल कारखानों व बेइंतहा फ़सल उत्पादन के लिए रासायनिक खादों का अति प्रयोग हरी-भरी बसुंधरा को मानव के रहने के योग्य नहीं छोड़ता है। प्रो. जी. एल. विश्वकर्मा ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अतिशय प्रयोग हवा, जल, ध्वनि, मृदा, प्रकाश व रेडियोएक्टिविएटी की गुणवत्ता में अशुद्धता पैदा करता है।
प्रो . आर. के. पहाड़े ने कहा कि जंगल जमीन के फेफड़े हैं, जो हवा को शुद्ध करते हैं। प्रो . सकरलाल बट्टी ने कहा कि हमारा पर्यावरण हमारे रवैये व अपेक्षाओं का आयना होता है। प्रो. लक्ष्मण उइके ने कहा कि पर्यावरण को खतरा अमीरों की अमीरी व कंपनियों की मुनाफाखोरी से बहुत है। प्रो. सुरेखा तेलकर ने कहा कि पक्षी पर्यावरण के संकेतक हैं, अगर वे खतरे में हैं तो हम भी नहीं बच सकेंगे। प्रो. रक्षा उपश्याम ने कहा कि सिर्फ संतुलित तापमान पर ही पृथ्वी स्वर्ग रह सकती है। पृथ्वी हमारी नहीं, हम पृथ्वी के हैं। संतोष अमोडियाने कहा कि विश्व का हर जीवधारी अपने हिस्से की शुद्ध ऑक्सीजन का अधिकारी है। विकास की अंधी दौड़ में हम कंक्रीट का जंगल खड़ा कर रहे हैं। कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित क्विज प्रतियोगिता में सभी विद्यार्थियों ने प्रतिभागिता की।

