मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
प्लास्टिक के प्रदूषण से जीवों के अस्तित्व पर संकट है": प्रो. अमर सिंह
प्लास्टिक से निकली जहरीलें गैसैं मिट्टी जल और वायु सभी को प्रदूषित करती हैं:प्रो रजनी कवरेती
उग्र प्रभा समाचार,चांद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में ईको क्लब द्वारा सतत जीवन शैली और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्लास्टिक/ पॉलीथीन से प्रदूषण: चुनौतियां और समाधान विषय पर आयोजित कार्यशाला में प्रमुख रिसोर्स पर्सन प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि पालीथीन/प्लास्टिक के उपयोग से मिट्टी, जल व प्रदूषण फैलता है, इसके एवज में कागज के बैग का प्रयोग करना चाहिए। प्लास्टिक से निकली जहरीलें गैसैं मिट्टी जल और वायु सभी को प्रदूषित करती हैं। प्लास्टिक निगलने में 1500 प्रकार के जीव प्लास्टिक निगलने से भारी जोखिम में हैं। प्रो . अमर सिंह ने कहा कि पॉलीथीन जलने से त्वचा संबंधी बीमारियां होती हैं। प्लास्टिक के प्रदूषण से भूमि की उर्वरता में कमी व भूजल प्रदूषित होता है प्लास्टिक टूटने से सूक्ष्म कण खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करके मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। प्रो. जी. एल. विश्वकर्मा ने कहा कि प्लास्टिक की थैली और पॉलीथीन की जगह कागज के थैले प्रयोग में लाने पर जोर दिया जाना चाहिए। प्लास्टिक/पालीथीन को पुनर्चक्रण से प्रयोग करके एवं इनका कम से कम प्रयोग करने पर फोकस किया जाना चाहिए। प्रो . सकर लाल बट्टी ने कहा कि प्लास्टिक कचरा एक भयावह समस्या है, इसके निष्पादन के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। प्लास्टिक अत्यंत ज्वलनशील है, इससे निकलने वाली गैसों से इंसान में कैंसर होता है और पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा हो जाता है। प्रो. सुरेखा तेलकर ने कहा कि इसकी रोकथाम के लिए जनसहभागिता, कुशल नेतृत्व एवं सकारात्मक इच्छाशक्ति की जरूरत है। प्लास्टिक/ पालीथीन के प्रयोग से हुए प्रदूषण से कई जीवजंतुओं की प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं। प्रो. रक्षा उपश्याम ने कहा कि अगर इस प्रदूषण को रोका नहीं गया तो भविष्य में मनुष्य के अस्तित्व पर संकट पैदा हो जाएगा। संतोष अमोडिया ने कहा कि आज स्थिति इतनी भयावह है कि अबोध जीव जंतु भी इसकी चपेट से बचे नहीं हैं। नदी, नाले व तालाब सब प्लास्टिक/पालीथीन से भरे पड़े हैं।
