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चांद कालेज में अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य उद्घाटन

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       मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

जैव विविधता संरक्षण में ही सतत जीवन संभव है: कुलगुरू प्रो. त्रिपाठी 

"प्राचीन व नवीन का समन्वय सतत जीवन की कुंजी है": प्रो. कटारिया उदयपुर 

" भारतीय शास्त्र जीवन प्रबंधन ज्ञान के अकूत खजाने हैं": प्रो. विनोद कुमार वाराणसी 

उग्र प्रभा समाचार,चांद छिंदवाड़ा:  शासकीय महाविद्यालय चांद में भारतीय शास्त्र परंपरा पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में प्रमुख अतिथि बतौर बोलते हुए राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरू प्रो. आई. पी. त्रिपाठी ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण ही सतत जीवन की कुंजी है। प्रमुख स्त्रोत वक्ता मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी उदयपुर के लोक प्रशासन विषय के प्रो. सुरेन्द्र कटारिया ने कहा कि प्राचीन व नवीन का समन्वय ही सतत जीवन की कुंजी है। भारतीय शास्त्र परम्परा भारत के प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करना है। जैव विविधता संरक्षण की मानव लअस्तित्व के हितार्थ सार्वभौमिक सार्वकालिक और सार्वजनिक उपता है। उदय प्रताप कॉलेज काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र के प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि भारतीय शास्त्र परंपरा में जीवन प्रबंधन के अकूत खजाने हैं, जिनका दोहन ही आधुनिक शिक्षा के स्वरूप में क्रांतिकारी परिवर्तन कर सकता है। समारोह अध्यक्ष रमेश दुबे ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वक्त के साथ मनुष्य में आई खामियों को खूबियों में तब्दील करने की युक्तियां समाहित हैं। चौरई विधायक सुजीत चौधरी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में आश्चर्यचकित करने वाले जीवन जीने के सूत्र हैं, जिनका दोहन किया जाना समय की मांग है। प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि भारतीय शास्त्र परंपरा में जो जीवन मूल्य हैं, वे सार्वभौमिक सार्वकालिक और सार्वजनिक उपयोगिता के हैं। चांद नगर परिषद अध्यक्ष दान सिंह ठाकुर ने कहा कि प्राचीनता में नवीनता के समन्वय से ही मनुष्य में स्थाई उत्कृष्टता हासिल हो सकती है। नागपुर से प्रो. प्रवीण जोशी ने कहा कि भारतीय शास्त्र परंपरा  सतत जीवन यापन के लिए आधारशिला प्रदान करती है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जीवन मूल्यों के अथाह सामर्थ्य प्रदान करने वाले खजाने हैं। प्रो. लक्ष्मीचंद ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में संस्कारों की मंदाकिनी प्रवाहित होती है। अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस मेंदेश विदेश से 250 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनका निष्कर्ष निकालकर शासन को प्रेषित किया जाएगा।

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