मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
चाँद काॅलेज में पर्यावरण संरक्षण से सतत जीवन शैली पर कार्यशाला आयोजित
"प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है": कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी
" सांसों के मोल चुकाने की सनक पर विकास घातक है": प्राचार्य प्रो. अमर सिंह
" पर्यावरण असंतुलन मानव अस्तित्व के लिए तबाही है"; एनीमेशन आर्टिस्ट डॉ. शांतनु पाठक
" प्राकृतिक संसाधन धरोहर हैं, लूट खसोट की वस्तु नहीं": दान सिंह ठाकुर
उग्र प्रभा समाचार,चांद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में रेड रिबन , राष्ट्रीय सेवा योजना एवं पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संस्थान एप्को (म.प्र.) एवं पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित "पर्यावरण संरक्षण से सतत जीवन शैली" विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि बतौर बोलते हुए राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही मानवता का संरक्षण है। पर्यावरण संरक्षण में लापरवाही का खामियाजा पूरी मानव समाज को भुगतना पड़ेगा। अतः समय रहते सचेत हो जाने में ही समझदारी है। कार्यशाला के अध्यक्ष चांद नगर परिषद के अध्यक्ष दान सिंह ठाकुर ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन हमारी जरूरतों के उपादान हैं, कोई लूट खसोट की वस्तु नहीं। विशिष्ट अतिथि मशहूर एनीमेशन आर्टिस्ट डॉ. शांतनु पाठक ने कहा कि पर्यावरण असंतुलन मानव अस्तित्व के लिए तबाही है। प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण लोकहितार्थ सबसे ज्वलंत मुद्दा है। सांसों के मोल चुकाने की सनक पर विकास घातक है। प्रो,।. विशिष्ट अतिथि प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि पर्यावरणीय संरक्षण की चेतना वृद्धि को मानवता के हितार्थ वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए।
प्रो. जी. एल. विश्वकर्मा ने कहा कि पर्यावरणीय प्रदूषण को हरित क्रांति के माध्यम से दूर करके मनुष्य की सांसों को विशुद्ध बनाए रखा जा सकता है। प्रो. सकरलाल बट्टी ने कहा कि बिना पर्यावरण संरक्षण के किसी भी जीवधारी के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। प्रो. सुरेखा तेलकर ने कहा कि सतत जीवक शैली पर्यावरण संरक्षण के बिना संभव नहीं है। कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित भाषण, वाद विवाद, प्रश्नमंच, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को स्मृतिचिन्ह व प्रमाणपत्रों द्वारा मुख्य अतिथि के हस्ते सम्मानित किया गया। कार्यशाला में प्रो. लक्ष्मण उइके, प्रो. राजकुमार पहाड़े, प्रो. रक्षा उपश्याम एवं संतोष अमोडिया का विशेष योगदान रहा।

