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विष्णु खरे हिन्दी व वैश्विक भाषाओं के बीच सेतु थे": प्रो. अमर सिंह

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     मोहिता जगदेव

 उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

चांद कालेज में विष्णु खरे स्मृति व्याख्यान आयोजित 

विष्णु खरे विदेशी भाषाओं के विरले अनुवादक थे"; प्रो. अमर सिंह 

"श्री खरे ने अनुवाद से विदेशी भाषाओं के मर्म को हिन्दी को दिया": प्रो अमर सिंह 

उग्र प्रभा समाचार,चांद,छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद के हिन्दी व अंग्रेजी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित छिंदवाड़ा के लब्ध प्रतिष्ठित कवि विष्णु खरे स्मृति व्याख्यान में प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने विष्णु खरे को प्रबल प्रतिभा का विश्वासी, कुशाग्र समझ, सामाजिक यथार्थ के कुछ अभागे व अलक्षित पक्षों की तल्खजुबान वाला साहित्यकार बताया। हिन्दी कविता को नई वैचारिक दिशा की सुघड़ता देने वाले कीर्तिलब्ध खरे संस्कृति के अतिरेक से बचने पर जोर देते थे। उनकी अभिव्यक्ति में सार्वजनिक निंदा और नैतिक संकोच के लिए कोई मुरव्वत नहीं थी। अंग्रेजी, जर्मन, फिनिश के साथ अन्य यूरोपीय व एशियाई विदेशी भाषाओं के महारथी विष्णु खरे अनुवाद के साथ वस्तुनिष्ठ ऊष्मा से भरे हुए समकालीन समाज की विद्रूपताओं के बेबाकीपन के आलोचक कवि थे। कविता, फिल्म समीक्षा, अनुवाद, पत्रकारिता व आलोचना में समान प्रवीणता रखने वाले विष्णु खरे में कला कर्म के मर्म को पकड़ने की बिरली क्षमता थी। उन्हें हिन्दी व वैश्विक भाषाओं के साहित्य के बीच सेतु की संज्ञा दी जाती है। विष्णु खरे ने विदेशी भाषाओं के मर्म को विरले अनुवादक के रूप में हिन्दी भाषा को दिया।


प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि विष्णु खरे के काव्य में गहरी भावनात्मक तड़फ, मुग्ध करने वाले परिदृश्य और आत्मकथात्मक बिंबों की भरमार है। उन्हें समकालीन समाज, राजनीति, संस्कृति व आम जीवन की गहरी अनुभूति थी। प्रो. जी. एल. विश्वकर्मा ने कहा कि विष्णु खरे होना असंभव है, उन तक पहुंचना कितना गहरा है, और उनकी जड़ें बहुत दूर तक चली गई हैं। प्रो. सकर लाल बट्टी ने विष्णु खरे को बौद्धिक रूप से आग्रही, प्रो. आर. के. पहाड़े ने विष्णु खरे को अतीतरागी, प्रो. सुरेखा तेलकर ने कुशाग्र समझ और प्रो. रक्षा उपश्याम ने दुलत्ती चला देने वाला कवि कहा।

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