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म. प्र. आंचलिक साहित्यकार परिषद की वासन्तीय काव्य गोष्ठी आयोजित

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             मोहिता जगदेव

       उग्र प्रभा समाचार ,छिंदवाड़ा 

अलगाववादी ताकतों का, डट के कर मुकाबला, 

कुरीतियाँ समाज की, तू उनकी अर्थियां जला ,

समाज संस्कृति बचा, तू राष्ट्र की अखण्डता ,

उठा तिरंगा हाथ में, माँ भारती पुकार कर।"

      श्री रामलाल सराठे *रश्मि*

चले जाओ ! बीते वर्ष! करने दो स्वागत ! 

तम चीरकर आती नव किरण का ,

नये वर्ष के नये युग का ,

नये युग के नये वर्ष का।"

   ओमप्रकाश सोनवंशी *नयन*

धर्म जाति भाषा से ऊपर दिल का रिश्ता प्यारा है। 

तेरा रब मेरा ईश्वर है ,भगवत मेरा दुलारा है। 

अलग अलग है धर्म जाति पर आपस में भाईचारा है। 

गंगा जमुनी संस्कृति ही हिंदुस्तान हमारा है।" 

       अनुराधा तिवारी *अनु*

 ,      बांट नहीं सकते तुम,

       मजहब के नाम पर चाँद ।

      जैसे बांट रखा है तुमने 

      धर्म के नाम पर इंसान ।

          मोहिता मुकेश *कमलेंदु*

उग्र प्रभा समाचार ,छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश आंचलिक साहित्यकार परिषद की बुंदेलखंड साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार रमाकांत मौर्य के निवास पर आयोजित वासंतीय काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि सुरेंद्र वर्मा ने वसंत ऋतु को ऋतुराज कहा। कार्यक्रम अध्यक्ष ओमप्रकाश नयन ने वसंत का स्वागत यों किया: "चले जाओ ! बीते वर्ष! करने दो स्वागत ! तम चीरकर आती नव किरण का ,नये वर्ष के नये युग का ,नये युग के नये वर्ष का।"विशिष्ट अतिथि कवि प्रकाश दुबे ने वसंत ऋतु को अनंत आनंद की ऋतु कहा। सरस्वती पूजन के पश्चात मोहिता मुकेश कमलेंदु द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई । मंच संचालन का कार्यभार कवि राजेंद्र यादव ने संभाला व आभार संस्था सचिव श्री रामलाल सराठे ने किया। वरिष्ठ कवि रामलाल सराठे ने अपनी कविता पढ़ी " "अलगाववादी ताकतों का, डट के कर मुकाबला, कुरीतियाँ समाज की, तू उनकी अर्थियां जला ,समाज संस्कृति बचा, तू राष्ट्र की अखण्डता ,उठा तिरंगा हाथ में, माँ भारती पुकार कर।" पद्मा जैन ने अपनी कविता यों पढ़ी "यूं तो साथ देने को हजार हाथ और हैं/ तेरा हाथ जो उठे तो उसकी बात और है / विद्या की तुम देवी हो जीवन संवार दो आज मेरे चित्त में तुम ज्ञान को उतार दो बिखरे इस जीवन को आज ही संवार दो/ तेरी महिमा आज चाहूं ओर है।" कवि राजेंद्र यादव ने अपनी कविता यों पढ़ी "अपनी मेहनत से बुलंदी पर पहुंच, देख फिर संसार पीछे भागता है।" 


कवयित्री मोहिता मुकेश कमलेंदु ने अपनी कविता यों पढ़ी "बांट नहीं सकते तुम/मजहब के नाम पर चाँद/ जैसे बांट रखा है तुमने/ धर्म के नाम पर इंसान "। कुमार सैनी ने बूढों की व्यथा पर यों प्रकाश डाला "आ गया बुढ़ापा तो तबियत घबराई है, पड़ गई खाट द्वारे तो पानी देने को कतराते घरवारे, सब कहें बूढ़ा दुखदाई है। तबियत और घबड़ाई है। "कवयित्री अनुराधा तिवारी ने " धर्म जाति भाषा से ऊपर दिल का रिश्ता प्यारा है। तेरा रब मेरा ईश्वर है ,भगवत मेरा दुलारा है। अलग अलग है धर्म जाति पर आपस में भाईचारा है। गंगा जमुनी संस्कृति ही हिंदुस्तान हमारा है।" कवि रमाकांत मौर्य ने अपनी कविता यों पढ़ी "ज्ञान बढ़े गुणवान की संगति, मान बढ़े तपसी संग कीजे।" कवयित्री ज्योति गुप्ता ने राष्ट्र पर्व पर अपनी कविता पढ़ी  “स्वतंत्रता केवल झंडे में नहीं, विचारों में भी हो।” संविधान सिखाता है: “अधिकार केवल शब्द नहीं, कर्तव्य भी साथ हो।” अंकुर बाल्मीकि ने अपनी कविता यों पढ़ी "अरे चल रही हवा तो देखो, लहर लहर में छुअन जहर की, थर थर कांप रहा है झंडा।" काव्य गोष्ठी में श्रीमती पुष्पलता मिश्रा व श्री हरिशंकर पांडे को श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।

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