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महापौर विक्रम आहके ने किया दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का शुभारंभ

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       मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा

प्रदर्शनी का शुभारंभ नगर निगम छिंदवाडा  महापौर विक्रम अहके के मुख्य आतिथ्य में हुआ

 साहित्यकार एवं पत्रकार श्री ललित दुबे के दो उपन्यास चिरंजीवी महर्षि वेदव्यास एवं चिरंजीवी विभीषण का भी किया गया विमोचन 

भारतीय परंपरा में चिरंजीवियों का विचार अमरता से अधिक अनुभव, संघर्ष और सीख का प्रतीक है :श्री ललित निरंजन दुबे 

पढ़ने की आदत व्यक्ति को भीड़ से अलग पहचान देती है : श्री अवधेश‌ तिवारी 

उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा :  स्व. अविनाश उपासनी नैतिक शिक्षा उपक्रम के अंतर्गत तरूणाई निःशुल्क वाचनालय के तत्वावधान में दो दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी की शुरुआत सोमवार को नगर के स्थानीय पेंशनर भवन परिसर में हुई। प्रदर्शनी में हिन्दी साहित्य, विवेकानंद सहित्य, बाल साहित्य, विज्ञान, पर्यावरण,उपन्यास, इतिहास, विज्ञान, दर्शन और बाल साहित्य सहित दो हजार से अधिक पुस्तकों को निःशुल्क अध्ययन हेतु उपलब्ध कराया गया है। पुस्तक प्रेमियों को न सिर्फ पढ़ने का अवसर मिलेगा, बल्कि पुस्तकालय की संस्कृति से पुनः जुड़ने का मौका भी मिलेगा।

प्रदर्शनी का शुभारंभ नगर निगम छिंदवाडा  महापौर विक्रम आहके के मुख्य आतिथ्य में हुआ। अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन न सिर्फ पुस्तकों के प्रति प्रेम जगाते हैं ,बल्कि युवाओं में ज्ञान और संस्कारों की ज्योति भी प्रज्वलित करते हैं। उनके अनुसार साहित्य के पन्नों में समाज की स्मृति और भविष्य की दिशा दोनों छिपी होती हैं।

वरिष्ठ शिक्षाविद एस.एस. सालोडकर ने युवाओं से आग्रह किया कि पुस्तकों को सिर्फ परीक्षा का साधन न समझें, बल्कि जीवन का सहचर बनाएं, क्योंकि ज्ञान की यह नदी जीवन भर साथ चलती है।

सांदीपनि विद्यालय गुरैया के प्राचार्य एवं शिक्षाविद श्री अब्दुल हक खान ने कहां कि साहित्य की साधना एक महत्वपूर्ण विषय है आप किताबों से जुड़े और इन्हें पढ़े। उन्होंने साहित्य को समाज की संवेदना का मेरुदंड बताते हुए कहा कि जितनी किताबें पढ़ी जाएँगी, उतनी ही दृष्टि और संवेदना विकसित होगी।

वरिष्ठ कहानीकार एवं उपन्यासकार श्री गोवर्धन यादव ने कहां कि यह आयोजन एक मील का पत्थर है ऐसी प्रदर्शनी नियमित रूप से लगना चाहिए। यह प्रदर्शनी पाठक और साहित्यकार के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करेगी। 

कार्यक्रम में अनुपपुर से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री ललित दुबे के दो उपन्यास चिरंजीवी महर्षि वेदव्यास एवं चिरंजीवी विभीषण का अतिथियों ने विमोचन किया। इस अवसर पर श्री दुबे ने कहां कि भारतीय परंपरा में चिरंजीवियों का विचार अमरता से अधिक अनुभव, संघर्ष और सीख का प्रतीक है और इन्हीं प्रेरणाओं से उन्होंने सात चिरंजीवी श्रृंखला का लेखन आरंभ किया।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं आकाशवाणी पूर्व उद्घोषक श्री अवधेश तिवारी ने कहा कि पुस्तकें मनुष्यता की सबसे बड़ी साथी हैं और पढ़ने की आदत व्यक्ति को भीड़ से अलग पहचान देती है। नई पीढ़ी अपने बच्चों को पुस्तके पढ़ने की प्रेरणा दे यदि बच्चे या कोई भी पाठक तीन मिनट भी कोई भी पढता है तो उतनी देर में ही नये विचार आयेंगे।

वरिष्ठ चित्रकार एवं साहित्यकार रोहित रूसिया ने कहा कि किताबें कल्पना की आग जलाती हैं और कलाकार से लेकर सामान्य पाठक तक सबको भीतर की रोशनी देती हैं।

कार्यक्रम की प्रस्तावना संस्था प्रमुख देवेंद्र उपासनी ने रखते हुए बताया कि बताया कि तरुणाई निःशुल्क वाचनालय  पिछले कई वर्षों से छात्रों के लिए निःशुल्क पुस्तकालय संचालित कर रही है। और प्रयास यह है कि इस वर्ष एक हजार पाठकों को वाचन संस्कृति से जोडना है । 


कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री ओमप्रकाश नयन ने बताया किा दो दिवसीय यह प्रदर्शनी मंगलवार तक पुस्तक प्रेमियों के लिए खुली रहेगी। मंगलवार शाम को आयोजन के अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है जिसमें शहर के जाने माने कवि लेखक अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देंगे। उन्होंने अंत में अतिथियों का आभार भी व्यक्त किया।

इस अवसर पर अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. वाय के शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार आर एस वर्मा,  वरिष्ठ साहित्यकार सुरेंद्र वर्मा, नेमीचंद व्योम, डाॅ. विजय कलमधार, शेफाली शर्मा, मोहिता जगदेव, विश्वश चंदेल, रामलाल सराठे रश्मि,  समाजसेवी आनंद बक्शी समाजसेवी श्यामल राव, संजय साहू, मनोज सोनी, जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक अखिलेश जैन आदि ने उपस्थित रहकर प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं प्रदर्शनी की सराहना की।

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