मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
ध्यान से प्राप्त शून्यता दृष्टि को गहराई प्रदान करती है": प्रो. अमर सिंह
" दिमाक को ध्यान की उतनी ज़रूरत है जितनी शरीर को भोजन की"; प्रो. अमर सिंह
"ध्यान का लक्ष्य वर्तमान क्षण पर पारदर्शी फोकस करना है": प्रो. अमर सिंह
उग्र प्रभा समाचार , चांद: शासकीय महाविद्यालय चांद में रेड रिबन विभाग की ओर से विश्व ध्यान दिवस पर आयोजित व्याख्यान में प्राचार्य प्रो.अमर सिंह ने कहा कि ध्यान से अपनी दृष्टि को गहराई प्रदान करने में मदद मिलती है। स्वयं को शून्य की स्थिति में ले जाना ही ध्यान है। वर्तमान क्षण पर पारदर्शी तरीके से फोकस करना ध्यान का केंद्रीय लक्ष्य है। हमारे दिमाक को ध्यान की उतनी ज़रूरत होती है, जितनी शरीर को भोजन की। हम जितने ध्यानस्थ होंगे, उतना अधिक सुन पाएंगे। हम अपने अंदर की महाशांति के समंदर में खुशियों के गोते लगा सकते हैं।
प्रो. लक्ष्मण उइके ने कहा कि विश्व में रचनात्मकता की संभावनाएं अनंत, असीम व अकूत हैं, बस हमारे दिमाक को आवश्यकता है गहन नीरवता में स्थित हो इसके आंतरिक जगत में अनुभव करने की। प्रो. सकर लाल बट्टी ने कहा कि प्रत्येक सांस के साथ तालमेल बैठाकर ही अपनी समझ में वृद्धि करना ध्यान से संभव है। प्रो. सुरेखा तेलकर ने कहा कि सचेतनता, एकाग्रता और हर पल में उपस्थिति रहने का कौशल ध्यान से आता है। संतोष अमोडिया ने कहा कि ध्यान से तनाव, चिंता व नकारात्मकता के भाव गायब हो जाते हैं। प्रो. रक्षा उपश्याम ने कहा कि धैर्य, संतुलित नींद, पुनः उठ खड़े होने की क्षमता एवं आत्मनियंत्रण की शक्ति मिलती है।

