लाड़ली बहनों को 1500 रुपये, पर गैस सब्सिडी 300 की जगह आ रही 6 रुपये पर ब्रेक!
सरकार की दोहरी नीति पर सवाल तेज—500 रुपये वाले सिलेंडर का वादा ठंडे बस्ते में, महिलाएँ बोलीं: “वादों का सर्कस दिखाकर अब सरकार गोल”**
उग्र प्रभा //छिंदवाड़ा /भोपाल (संपादक नीलेश डेहरिया )
मध्यप्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित लाड़ली बहना योजना नवंबर महीने से नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। सरकार ने राशि ₹1250 से बढ़ाकर ₹1500 कर दी है और इसे बड़ा निर्णय बताकर व्यापक प्रचार भी किया। लेकिन दूसरी ओर रसोई गैस पर दी जाने वाली राहत पूरी तरह से ठप पड़ चुकी है, जिससे घर–गृहस्थी चलाने वाली महिलाओं में गहरी नाराज़गी साफ दिखाई दे रही है।राज्य सरकार ने पहले दावा किया था कि लाड़ली बहनों को 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा। दावा इतना मजबूत था कि महिलाओं ने इसे एक बड़ी राहत के रूप में स्वीकार भी किया। कुछ महीनों तक ₹300 की सब्सिडी खाते में आती भी रही, जिससे गैस सिलेंडर की कीमत थोड़ी कम होकर पहुंच रही थी। लेकिन सितंबर माह के बाद से यह सब्सिडी पूरी तरह रुक गई है।
सब्सिडी बंद, सिर्फ 6 रुपये खाते में—900 रुपये में गैस खरीदने मजबूर महिलाएँ
रसोई गैस की कीमतें एक बार फिर ₹900 के पार पहुंच चुकी हैं। ऐसे समय में सब्सिडी बंद होना सीधे तौर पर रसोई पर आर्थिक बोझ बढ़ाने जैसा है। कई महिलाओं के खातों में सब्सिडी के नाम पर सिर्फ ₹6–₹10 की राशि दिखाई दे रही है, जिसे हितग्राही ‘सरकारी मज़ाक’ के रूप में देख रही हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक गंभीर है। जगह-जगह महिलाएँ गैस एजेंसी, CSC केंद्र, ग्राहक सेवा हेल्पलाइन और बैंकों के चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है। महिलाएँ कह रही हैं कि पोर्टल पर स्थिति ‘processing’ दिखती है, पर राशि जमा नहीं हो रही।
महिलाओं का सीधा आरोप है—
“सरकार की दोहरी नीति समझ नहीं आ रही। चुनाव के समय वादों का सर्कस दिखाया, एक बार शुक्रिया में आए और उसके बाद सब बंद। गैस सब्सिडी तीन महीने से ठप है। यह वादा खिलाफी नहीं तो क्या है?”लाड़ली बहनों की बढ़ी राशि पर भी उठ रहे सवाल नवंबर से बढ़ाकर दी गई ₹1500 की राशि जरूर महिलाओं के खाते में नियमित पहुंच रही है, परंतु रसोई खर्च पर होने वाले ₹900 के गैस सिलेंडर ने बढ़ोतरी का प्रभाव कम कर दिया है। महिलाओं का कहना है कि—
“1500 ठीक है, पर गैस अगर 900 में ही खरीदना है तो इसका क्या फायदा? राहत की सबसे ज़रूरी जगह पर ही ब्रेक लगा दी गई।”
जमीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे सरकार का वादा : 500 रुपये में गैस सिलेंडर
वास्तविकता : बाजार में गैस 900 रुपये पहले : ₹300 की सब्सिडी आती थीअब : केवल ₹6–₹10नवंबर से : लाड़ली बहना राशि बढ़कर ₹1500मगर : गैस सब्सिडी तीन महीने से बंद राजनीतिक गलियारों में चर्चा—क्या जनता ने भरोसा खोना शुरू कर दिया?राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि रसोई और दैनिक जीवन से जुड़े मुद्दे सीधे जनता की नस को छूते हैं। सब्सिडी रुकना, बढ़ी कीमतें और सरकारी वादों का अधूरा रह जाना महिलाओं के बीच असंतोष बढ़ाने का कारण बन रहा है। कई क्षेत्रों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन चुका है कि क्या सरकार जनता से किए वादों को निभाने में गंभीर है या नहीं।
कुछ सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाया है कि “लाड़ली बहनों को 1500 रुपये देना स्वागत योग्य है, लेकिन गैस सब्सिडी बंद करना किस नीति का हिस्सा है? क्या सशक्तिकरण सिर्फ घोषणाओं तक सीमित है?”
महिलाओं की आवाज़—“राहत चाहिए, रस्मी घोषणा नहीं”
रसोई चलाने वाली महिलाओं की सबसे स्पष्ट मांग है—“500 रुपये में गैस सिलेंडर देने का वादा पूरा किया जाए और 300 रुपये वाली सब्सिडी तुरंत बहाल की जाए। घर की महत्वपूर्ण जरूरत को कार्यक्रमों और भाषणों में नहीं, व्यवहारिक मदद में पूरा किया जाता है।”
