Type Here to Get Search Results !

आईपीएस कॉलेज में भारतीय ज्ञान: शिक्षा की बुनियाद विषय पर व्याख्यान

0

       मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

"शिक्षा मानव मूल्य केंद्रित हो न कि विधर्मी व्यवहार केंद्रित ": कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी 

"भारतीय शिक्षा की बुनियाद भारत केंद्रित हो, न कि यूरोप केंद्रित": प्रो. राम देशमुख 

उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा: कालिदास संस्कृत अकादमी म. प्र. संस्कृति परिषद उज्जैन एवं राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के संयुक्त आयोजन में सारस्वत वक्तव्य के अन्तर्गत भारतीय ज्ञान: शिक्षा की बुनियाद विषय पर बोलते हुए विद्या भारती विदर्भ के अध्यक्ष प्रो. राम देशमुख ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व में सिरमौर बनने हेतु गुरुत्वाकर्षण का केन्द्र भारत बने, यूरोप नहीं। शिक्षा की बुनियाद भारतीय ज्ञान प्रवाह के जरिए विश्व बंधुत्व की भावना को प्रबल बनाए व देवत्व को जगाए। संस्कृति विभाग के गोविंद दत्तात्रेय ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति के संस्कार मनुष्यता निर्माण को पोषित करने वाले हैं, इसी से भारतीयता जिन्दा रह सकती है। राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि हमारी शिक्षा की बुनियाद भारतीय संस्कृति के स्थाई मानव मूल्यों की नींव पर खड़ी हो, न कि क्षणिक आनंद की चीजें पर, क्योंकि विधर्मी मूल्यों के क्षरण में नाहक रुचि लेते हैं। हमारी शिक्षा छात्र के भविष्य की नींव का निर्माण करे जिसमें सदाचार व निर्मल विचार हों जो मानसिक आजादी दिलाएं।


हमारी शिक्षा की नींव उस वैचारिकी पर हो जिससे मां, मातृभूमि व मातृभाषा की छवि वैश्विक स्तर पर बरकरार रहे: प्रो .अमर सिंह 

मानवीय विकास का सतत संतुलित वैदिक व आधुनिक शिक्षा का समागम शिक्षा प्रणाली की आधारशिला बने: नरेंद्र पाल

आई पी एस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. जैमिनी खानवे ने कहा कि हमारी शिक्षा का केंद्र गहनता व समालोचनात्मक सोच विकसित करे, ज्ञान को व्यावहारिक रूप से प्रज्ज्वलित करे। प्रो। धनाराम ने कहा कि हजारी शिक्षा की बुनियाद विकास की मानसिकता को पोषित करे व मन मस्तिष्क को सही सोचने को प्रशिक्षित करे। नरेंद्र पाल ने कहा कि जो मानवीय विकास का सतत  संतुलित व वैदिक व आधुनिक शिक्षा का समागम शिक्षा प्रणाली की आधारशिला बने । प्रो. सीताराम शर्मा ने कहा कि शिक्षा वही जो व्यक्ति के स्वाभिमान को बरकरार रख अंतर्निहित संभावनाओं का विकास करे न कि वाह्य दिखाबे का अलंकार बने। शासकीय महाविद्यालय चांद के प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि हमारी शिक्षा की नींव उस वैचारिकी पर हो जिससे मां, मातृभूमि व मातृभाषा की छवि वैश्विक स्तर पर बरकरार रहे। मंच संचालन करते हुए प्रो. रीतेश मालवीय ने कहा कि शिक्षा लोकव्यवहार में खरी उतरे, न कि कोरा सैद्धांतिक जान परोसे।

More Interesting Posts

Post a Comment

0 Comments

Footer

चैनल सब्सक्राइब करे

📺 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें


🔔 SUBSCRIBE NOW