मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
पोषण माह पर विशेष, "एक थाली सेहत वाली"
थीम - बेहतर जीवन के लिए सही पोषण करें
प्रस्तुति - संगीता बामने
हम सभी जानते हैं कि एक से सात सितंबर तक पोषण सप्ताह मनाया जाता है इस वर्ष पोषण सप्ताह की थीम "बेहतर जीवन के लिए सही पोषण करें"है और इस पूरे सितंबर के महीने को पोषण माह के रूप में मनाते हैं इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना, संतुलित आहार के प्रति लोगों को जागरूक करना एवं पोषण शिक्षा के महत्व को बताना है ।इस कार्यक्रम को गहनता से लेना अत्यंत आवश्यक है,हम सभी जानते हैं सतत विकास लक्ष्य-2 को भारत को 2030 तक भूख तथा सभी प्रकार के कुपोषण से मुक्ति दिलाना है परंतु छिपी भूख या हिडन हंगर जैसी अदृश्य समस्या इस लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थता का कारण पैदा कर रही हैं, हमारे देश की आधी जनसंख्या इस छिपी भूख की शिकार बनी हुई है , एक ओर ग्रामीण जनसंख्या जहां गरीबी, अज्ञानता,संसाधनों की सीमितता के कारण पोषक तत्वों का अभाव है, तो दूसरी तरफ शहरी जनसंख्या का जंक फूड, फास्ट फूड, तली भूनी चीज एवं पैकेट बंद चीजों की ओर झुकाव पोषण की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं जिसके कारण शारीरिक एवं मानसिक विकास अवरुद्ध हो रहा है, चिड़चिड़ापन , पढ़ाई में मन नहीं लगना तथा बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं और कार्य की क्षमता प्रभावित होती है जिससे उत्पादकता पर भी प्रभाव पड़ता है और भविष्य में आय कि कमी से भी प्रभावित होते है।विश्व स्वास्थ्य संगठन और हार्वर्ड पब्लिक स्कूल द्वारा हाल ही मे प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार करीब 68% वैश्विक आबादी आयोडीन की कमी, 67% विटामिन ई की कमी, 66%कैल्शियम की कमी और 65%आयरन की कमी से ग्रसित है। और जब हम भारत की बात करते हैं तो यह आंकड़े और भी ज्यादा डराने वाले हैं क्योंकि आईसीएमआर जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार देश की 80% जनसंख्या कम से कम एक जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी से ग्रसित है, इसका मुख्य कारण पोषक तत्व की पर्याप्त जानकारी का अभाव है। भारत सरकार द्वारा भी इस समस्या के समाधान हेतु कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है स्कूल में मिड-डे मील, आंगनबाड़ियों में पोषण आहार कार्यक्रम जिसमें बच्चों माता एवं गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण वितरित किया जाता है। अन्य भी कई प्रकार की योजनाएं हैं अतः पर्याप्त पोषक तत्व की जानकारी लोगों को देकर इस दृश्य समस्या से बचने का सही मार्ग हो सकता है सही जीवन शैली के आधार पर हम 2030 का सतत विकास लक्ष्य-2 को प्राप्त कर सकते हैं,और देश को इस गम्भीर समस्या से निजात मिल सकती है।
संगीता बामने,
सहायक प्राध्यापक,
गृह विज्ञान ,शासकीय महाविद्यालय भैंसदेही
