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हर जीवन अनमोल है, आत्महत्या को रोकना हम सबकी जिम्मेदारी : डाॅ. संदीप गोहे

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        मोहिता जगदेव

   उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

विश्व आत्म हत्या रोकथाम दिवस विशेष - 

कठिनाइयाँ अंत नहीं, नई शुरुआत हैं: डॉ. संदीप गोहे

हर जीवन अनमोल है, आत्महत्या को रोकना हम सबकी जिम्मेदारी

उग्र प्रभा समाचार ,बैतूल : हर जीवन अनमोल है, आत्महत्या को रोकना हम सबकी जिम्मेदारी है। मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संदीप गोहे ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में यह प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है कि लोग छोटी-सी असफलता, रिश्तों में दरार, परीक्षा का दबाव या बेरोजगारी जैसी स्थितियों में तुरंत जीवन समाप्त करने का निर्णय ले लेते हैं। जबकि कठिनाई का अर्थ अंत नहीं बल्कि नए रास्ते की तलाश होना चाहिए।

डॉ. संदीप गोहे ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की समझ की कमी आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह है। बहुत से लोग मानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य का मतलब केवल बीमारी न होना है, जबकि यह हमारी सोचने, महसूस करने और दूसरों से जुड़ने की क्षमता से सीधा जुड़ा है। जब मन असंतुलित होता है तो छोटी-सी समस्या भी पहाड़ जैसी लगने लगती है। जब व्यक्ति को लगता है कि कोई सुनने वाला नहीं है, तो निराशा गहरी हो जाती है। और जब मदद मांगना कमजोरी समझा जाता है, तो लोग अंदर ही अंदर टूटने लगते हैं।

- आत्महत्या आवेग में लिया गया निर्णय

मनोविज्ञान के आधार पर डॉ. संदीप गोहे ने बताया कि आत्महत्या कई बार आवेग में लिया गया निर्णय होता है, जो कुछ ही मिनटों में हो जाता है। निराशा और असहायता की भावना, सामाजिक दूरी और भावनात्मक दबाव इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि पुरुष आत्महत्या से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि उन पर परिवार और समाज की जिम्मेदारियों का अतिरिक्त बोझ होता है। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे हमेशा मजबूत रहें और कभी न टूटें। कानूनी और रिश्तों से जुड़ी परेशानियां भी उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरी चोट करती हैं। पुरुष अक्सर अपनी पीड़ा को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे वे और अधिक टूट जाते हैं।

- मदद लेना और देना सामान्य बनाना होगा

समाधान बताते हुए डॉ. संदीप गोहे ने कहा कि हमें सुनना सीखना होगा। कई बार किसी की बात धैर्य से सुन लेना ही जीवन बचा सकता है। मदद लेना और देना सामान्य बनाना होगा। जैसे कोई डॉक्टर से इलाज लेने में शर्म महसूस नहीं करता, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी सोच बदलनी होगी। परिवार, दफ्तर और स्कूल में ऐसा माहौल होना चाहिए कि लोग बिना डर के अपनी भावनाएं बांट सकें। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली को भी जरूरी बताया, जिसमें पर्याप्त नींद, व्यायाम, संतुलित आहार और ध्यान जैसी आदतें शामिल हैं।

डॉ. संदीप गोहे ने कहा कि आत्महत्या पूरे परिवार और समाज की त्रासदी होती है। इसे रोकना संभव है, अगर हम सब मिलकर मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, कलंक को तोड़ें और संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दें। उन्होंने अंतिम संदेश में कहा कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, उनका समाधान है।

- भारत सरकार ने शुरू की किरण हेल्पलाइन 

उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए किरण हेल्पलाइन शुरू की है। किरण हेल्पलाइन 1800-599-0019 टोल-फ्री नंबर है, इस हेल्पलाइन पर प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक कॉल रिसीव करते हैं। यहां तनाव, चिंता, अवसाद या आत्मघाती विचार से जूझ रहे लोगों को तुरंत परामर्श मिलता है। नशे, पारिवारिक विवाद और अकेलेपन जैसी समस्याओं में भी सहारा दिया जाता है और जरूरत पड़ने पर नजदीकी मानसिक स्वास्थ्य केंद्र से कनेक्ट कराया जाता है।

डॉ. संदीप गोहे का मानना है कि आत्महत्या को रोकना संभव है, अगर हम सब मिलकर जीवन को महत्व दें और मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही प्राथमिकता दें जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को।

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