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प्रशासन की लापरवाही के चलते यूरिया के बिना बेरंग लोटे किसान भाजपा सरकार मे किसान यूरिया को मोहताज

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 प्रशासन की लापरवाही के चलते  यूरिया के बिना बेरंग लोटे किसान भाजपा सरकार मे किसान यूरिया को मोहताज 


एडिशनल एसपी डीएसपी एसडीएम की मौजूदगी में किसानो को दो-दो बोरी यूरिया वितरण 


अमरवाड़ा // उग्र प्रभा

 अमरवाडा मंडी प्रांगड में सोमवार को अन्नदाता किसानो की भीढ यूरिया के लिए हजारो की तादाद में देखने को मिली। कुछ दिनों से किसान लगातार  यूरिया के लिए सडकों में उतरकर विरोध कर रहे थे। और प्रशासन के समक्ष तहसीलदार एसडीएम सें मिलकर अन्नदाता अपनी पीढा सुनाकर फसल की चिंता जाहिर करते हुए गुजारिश करते नजर आए। और प्रशासन कलेक्टर के द्रारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पर्याप्त मात्रा में यूरिया की अफवाह फैलाई दूसरी और किसान जब यूरिया वितरण केन्द्र पहुचें खाली हाथ लौटे उसके बाद स्वतः कलेक्टर शुक्रवार को अपरान्ह अमरवाडा पंहुचकर अधिकारियो की बैठक ली और शनिवार को प्रशासन के द्वारा अमरवाडा विकासखंड के सभी ग्रामो में कोटवारो के माध्यम से मुनादी कराई सोमवार को मंडी प्रांगड अमरवाडा में यूरिया वितरण की जा रही है सभी किसान निम्न दस्तावेज लेकर पहुंचे। सूचना मिलते ही रविवार की रात से ही महिला पुरूष किसानो नें मंडी प्रांगड में जाकर बैठने लगे और सुबह होते तक किसानो की इतनी भीढ बढ चुकी कि यूरिया वितरण के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक छिंदवाड़ा को अमरवाडा पंहुचकर कमान संभालने पढी।एसडीओपी टीआई पुलिस कर्मी एसडीएम तहसीलदार कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारीयो की मौजुदगी में किसानों को संभालना और यूरिया वितरण करना एक जटिल समास्या बन गई। किसानों का अक्रोश इतना बढ गया अपने - अपने को यूरिया खींचकर रखने लगे। बिना तैयारी के तहसील स्तर सें किसानो को सूचना देकर बुलाना प्रशासन की लापरवाही है। अन्नदाता किसान वैसे ही अधिक बर्षा से फसल क्षति मक्का पौधा में पीलापन पौधे मरना जिलकन जैसी समास्या सें जूझ रहा है दूसरी और प्रशासन बिना रणनीति तैयारी कें 50 किमी दूरी सें किसानों को बुलाना और जिन किसानों का नम्बर लगा दो-दो बोरी वितरण करना जिन किसानों का नम्बर नही लगा उन किसानो को अपना वाहन लेकर  बेरंग वापस लोटना पढा। यह प्रशासन की लापरवाही है। एक साथ किसानों को बुलाना प्रशासन की मुर्खता है किसानो की समास्या कौन सुनेगा बेचारा अन्नदाता कैसे किराया भाढा का इंतजाम करके पहुंच रहा है दस चक्कर काटने के बाद यूरिया की बोरी मिल रही सारे खर्च जोडा जाये तो हजार रुपये में एक बोरी पढ रही है।

भाजपा सरकार भले किसानों से बडा वादा करे लेकिन किसानो की समास्या तो सडक से लेकर प्रशासन के दफ्तर और खेत में दिखाई दे रही है। किस तरह अन्नदाता सडक में उतरकर भूखे प्यासे आय का एक मात्र साधन कृषि की अच्छी परवाह मेहनत कर अच्छा उत्पादन लेना चाहता है लेकिन बिना उर्वरक के फसल उत्पादन भी नही हो रहा है

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