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संकल्प की शक्ति से पहाड़ भी खिसकाया जा सकता है,": प्रो. अमर सिंह

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       मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा 

पी. जी. कॉलेज में आत्मसाक्षात्कार से शख्सियत निर्माण पर परिचर्चा 

"निस्वार्थ कर्मयोगी को हराना नामुमकिन होता है:" प्रो. अमर सिंह 

जीवन को जो हम देते हैं, जीवन वही हमें लौटाता है: प्रो जी बी डहेरिया 

 आत्म साक्षात्कार, आत्म विश्लेषण, स्वयं की क्षमताओं पर संदेह न करना प्रेरणाओं के केंद्र में होते हैं: प्रो नीलिमा सोनी

" जीवन जीने के पीछे कोई बहुत बड़ी वजह होनी चाहिए ": प्रो. अमर सिंह

उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा: प्रधानमंत्री कालेज ऑफ एक्सीलेंस में प्राचार्य डॉ वाय. के. शर्मा के संरक्षकत्व में अंग्रेजी विभाग द्वारा अपने छात्रों के लिए आयोजित  आत्मसाक्षात्कार से शख्सियत निर्माण पर परिचर्चा में प्रो. अमर सिंह ने कहा कि संकल्प की शक्ति से पहाड़ भी खिसकाए जा सकते हैं। व्यक्ति अगर ठान ले तो कुछ भी हासिल करना नामुमकिन नहीं है। जहां चाह, वहां राह होती है। लीक से हटकर कुछ अलग करने की ललक हमें अपने हिस्से की गंदगी हटाने में आत्मा को सुकून देती है। कोई भी परिवर्तन सबसे पहले वैचारिक स्तर पर होता है। स्वयं को प्रज्ज्वलित करना हमारे हाथ में होता है। व्यक्ति को हर रोज अपना ही रिकॉर्ड तोड़ना चाहिए। जो दूसरों के लिए निश्वार्थ खड़ा होता है, उसे हराना मुश्किल होता है। विषम परिस्थितियों में अपनी स्थिति को संभालना हमारे हाथ में होता है। संकल्प जनित अनंत ऊर्जा से विरले कार्मिक पहाड़ खड़ा करने से विरली सफलता मिलती है। जीवन जीने के पीछे किसी बहुत बड़ी वजह के बिना ऊर्जा लक्ष्य पर केंद्रित नहीं हो पाती है। मनुष्य अगर अपनी इच्छा शक्ति के ब्रह्मास्त्र से जहां चाहे, वहां वैकल्पिक रास्ते निकाल सकता है।

प्रो. पी. एन. सनेसर ने कहा कि जीवन का अन्वेषण कर अंतर्निहित संभावनाओं की तलाश, सपनों पर योजनाबद्ध फोकस किसी भी व्यक्ति को सफलता के द्वार खोल सकता है। विभागाध्यक्ष अंग्रेजी प्रो. दीप्ति जैन ने कहा कि कुछ अलहदा करने की चाहत, कर्म को ही धर्म और रीति नीति प्रीति के व्यवहार से लोग दूसरों के हृदय में जगह बना लेते हैं। जब देश बहुत देता है, तो उसे लौटाने की चाहत जीवन के मकसद को पूरा करती है। प्रो. जी. बी. डहेरिया ने कहा कि निरंतर अभ्यास से उत्कृष्टता प्राप्ति की बात कहते हैं। जीवन को जो हम देते हैं, जीवन वही हमें लौटाता है। प्रो. तृप्ति मिश्रा ने कहा कि पुरुषार्थ से प्रारब्ध निर्माण, कर्म यज्ञ से अपनी किस्मत खुद लिखना और जो हम हैं और जो हो सकते हैं, के अंतराल को भरना हर मनुष्य के जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। प्रो.नवनीत भाटिया ने कहा कि जीवन की खाली किताब पर कर्मों की स्याही से लिखा जाता है। अभावों में जीने वाले लोग अकूत शक्ति की गुंजाइश के धनी होते हैं। प्रो. नीलिमा सोनी ने कहा कि शिक्षा स्वयं के अधिकतम प्रकटीकरण का सूत्र है। आत्म साक्षात्कार, आत्म विश्लेषण, स्वयं की क्षमताओं पर संदेह न करना प्रेरणाओं के केंद्र में होते हैं। परिचर्चा में एम. ए. अंग्रेजी के लगभग सौ छात्रों ने प्रतिभागिता सुनिश्चित की।

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