मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
कन्या महाविद्यालय में अंग्रेजी के छात्रों को शोध पर गहन मंथन
"शोध लोकहित में नवीन वस्तुपरक ज्ञान का अन्वेषण है ": प्रो,. उमा पंड्या
" शोध तथ्यों के गहन वैज्ञानिक विवेचन से अंतिम परिणाम देता है ": प्रो. नयन बाला दास
" शोध क्रियात्मक अनुसंधान से सूचनाओं को ज्ञान में बदलता है ": प्रो. विजय कलमधार
उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा: राजमाता सिंधिया शासकीय कन्या महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति के अंतर्गत स्नातक चतुर्थ वर्ष में छात्रों को शोध प्रबंध तैयार करने के लिए आयोजित गहन मंथन में प्रो. अमर सिंह ने कहा कि शोध किसी समस्या के हल का विशेष ज्ञान है। शोध की प्रकृति व्यवस्थित, वैज्ञानिक, अनुसंधान व रचनात्मक प्रक्रिया से गुजरती है। शोध पूर्व में प्राप्त ज्ञान का पुनः परीक्षण, परिमार्जन व विधिवत गवेषणा करके ज्ञान की नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। शोध प्रक्रिया विश्लेषणों के विविध तूफानों से गुजरती है। अनुसंधान में जिज्ञासा समाधान, बोधपूर्वक तथ्यों का संकलन, सूक्ष्मग्राही विवेचक बुद्धि से नए सिद्धांतों का उद्घाटन किया जाता है। शोध में प्रेक्षण, परीक्षण, समीक्षा और गहन विश्लेषण से समस्या के स्थाई हल के उद्देश्य तक पहुंचा जा जाता है। अंग्रेजी की विभागाध्यक्ष प्रो. उमा पंड्या ने कहा कि शोध कार्यप्रणाली अधिक औपचारिक, तथ्यों को अधिक वस्तुपरक, कार्य कारण संबंध की समझ व तार्किक प्रयत्नों द्वारा नए लोकहित में नए सिद्धांतों का निर्माण करती है। शोध में विभिन्न वस्तुओं, प्राणियों और पूर्व में संचित ज्ञान के अंतः सह संबंधों का अध्ययन कर छिपे सत्य का पता लगाया जाता है। प्रो. नयन बाला दास ने कहा कि सैद्धांतिक शोध व्याख्यात्मक आधार पर वैज्ञानिक विधि से सिद्धांतों का प्रतिपादन करता है। सत्यात्मक शोध दार्शनिक प्रकृति से अंतिम परिणाम तक पहुंचने में मदद करता है। प्रो,. विजय कलमधार ने कहा कि तथ्यात्मक शोध वर्णनात्मक ढंग से तथ्यों का विश्लेषणात्मक अन्वेषण करता है। व्यावहारिक शोध विकासात्मक क्रियात्मक अनुसंधान से उपयोगिता को महत्व देता है।
