मोहिता जगदेव,उग्र प्रभा समाचार
शिक्षक छात्र में प्रश्न पूछने का साहस विकसित करें": प्रो. अमर सिंह
भविष्य का भारत अतीत की बहसों में न उलझे": प्रो. सुदीश सूर्यवंशी
भावी भारत भयमुक्त व ऊंचा मस्तक रखने वाला बने": प्रो. सकरलाल बट्टी
उग्र प्रभा समाचार,चांद,छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में भारतीय संस्कृति ज्ञान परंपरा और राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित व्याख्यान में प्रो अमर सिंह ने कहा कि हमारे सपनों का भारत ऐसा हो जहां शिक्षक सिर्फ पाठ्यक्रम ही नहीं, सोचने की क्षमता, प्रश्न पूछने का साहस और सच को पहचानने की समझ दे। जहां किसी नागरिक को उसकी जाति, धर्म, भाषा, और पहचान के कारण कमतर न समझा जाए। प्रो. सुदीश सूर्यवंशी ने कहा कि भारत ऐसा हो, जहां भारत का भविष्य अतीत की बहसों में न उलझे। जहां बेटियों के प्रति बेटों का व्यवहार संयमित हो। प्रभारी अधिकारी प्रो. सकरलाल बट्टी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भविष्य का भारत ऐसा हो, जहां मन भय से मुक्त और मस्तक ऊंचा हो। लोकतंत्र सिर्फ अधिकार ही नहीं है, सक्रिय जिम्मेदारी भी है।
प्रो. सुरेखा तेलकर ने कहा कि भविष्य का भारत अतीत की बहसों में न उलझे। प्रो. राजकुमार पहाड़े ने भविष्य के भारत में अतीत की कड़वाहट नहीं, नेतृत्व भावनाओं से नहीं, अपितु विवेक से निर्णय लेने पर जोर दिया। प्रो. रक्षा उपश्याम ने भविष्य के भारत की भाषा विभाजन की नहीं, बल्कि संवाद की भाषा बने। प्रो. लक्ष्मण उइके ने कहा कि भविष्य का भारत पर्यावरण संरक्षण के गंभीर मुद्दे को सिर्फ भाषणों तक सीमित न रखे, बल्कि अपनी विरासत का समझकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करे। संतोष अमोडिया ने कहा कि भविष्य का भारत न्यायपूर्ण व संवेदनशील बने, जहां नागरिक सिर्फ स्वतंत्र ही नहीं, सच्चे अर्थों में जाग्रत भी हों। प्रो. अजय तेलंग ने कहा कि भविष्य का भारत नफरत को सामान्य न बनाए, बल्कि राष्ट्र भय से नहीं, विश्वास से आगे बढ़े।

