मोहिता जगदेव,उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
साहित्य समाज की बेहतरी के लिए विशिष्ट चिंतन होता है": महापौर विक्रम अहाके
श्रीनिवास मिश्र की कविताएं सांस्थानिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज हैं": अवधेश तिवारी
श्रीनिवास मिश्र की कविताएं सामाजिक विद्रूपताओं की औषधि हैं": प्रो. अमर सिंह
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा: म.प्र.आंचलिक साहित्यकार परिषद की अक्षत स्मृति साहित्य वाटिका (अक्षत उपवन) सिविल लाइंस छिंदवाड़ा में आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी में छिंदवाड़ा के महापौर विक्रम अहाके द्वारा जवाहर नवोदय विद्यालय बरगी जबलपुर के प्राचार्य डॉ. श्रीनिवास मिश्र के काव्य संग्रह "ढाई आखर प्रेम बिना" का विमोचन करते हुए कहा कि साहित्य समाज की बेहतरी के लिए सामाजिक सरोकारों के प्रश्नों पर संवेदनशील चिंतन होता है। सभापति मनोज सक्सेना ने श्री मिश्र के काव्य संग्रह को आज के ज्वलंत विषयों पर कारगर रचनात्मक वैचारिकी बताया। अवधेश तिवारी ने इस काव्य संग्रह में संकलित रंग बिरंगी कविताओं को सांस्थानिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध बुलंद आवाज कहा। रत्नाकर रतन ने अपनी कविता में समाज में रामराज्य की स्थापना में अहंकारी तत्वों के विनाश को रेखांकित किया। कवि डॉ. श्रीनिवास मिश्र ने कहा कि शब्दानुभूति से सृजित संवेदना में भौतिक दुनिया के नकारात्मक प्रभावों का समाधान है। नंदकुमार दीक्षित ने 'कलुषित मन के वातायन में सुरभित पुष्प खिला दो, प्रो. अमर सिंह ने श्री मिश्र के काव्य संग्रह को समाज की विद्रूपताओं का उद्घाटन करती प्रीति की रीति को स्थापित करने वाली विशद मानवीय आवाज कहा। रामलाल सराठे ने काव्य संग्रह को सामाजिक विसंगतियों को उजागर करने वाला दस्तावेज बताया। अशोक जैन ने अपनी कविता 'जब तक मन में प्यार न जागे, कोई गीत नहीं बनता है ', राजेंद्र चौबे ने ' कुत्ता पागल होने पर काटने दौड़ता है, आदमी के लिए पागल होना जरूरी नहीं है' ।
श्रीमती मोहिता मुकेश कमलेंदु ने 'कलयुग के रावण को मारने राम को वनवास नहीं जाना पड़ेगा' व्यंग्य रचनाओं से सबको आनंदित कर दिया। श्रीमती अनुराधा तिवारी ने अपनी कविता ' राम को मानते हो तो राम की भी मानिए ', के. के. मिश्रा ने महिलाओं के मायके के प्रति अनुराग की अभिव्यक्ति एवं ओमप्रकाश नयन ने वैश्विक अशांति फैलाने वाली महाशक्तियों को 'पकड़ा देते हो दुनिया के हाथों में हिरोशिमा नागासाकी के खंडहर' संदर्भों से अपनी रचनाएं पढ़ी। लघु कहानीकार पवन शर्मा ने आदमी के भीतर सन्नाटा शीर्षक से हंसी के संदिग्ध होने पर हंसना छोड़ने, विशाल शुक्ल ने ' हमको सिर्फ वही जलाए, जो चरित्र में राम समान हो ' और श्रीमती ज्योति गुप्ता ने ' हर मुश्किल में साथ निभाया राधा ने, श्याम को राधेश्याम बनाया राधा ने ' विषयक अपनी रचनाएं पढ़ी।


