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यह सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों का सम्मान है :माननीय राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उईके

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     मोहिता जगदेव

उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

यह सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों का सम्मान है और इस महाविद्यालय से उनका आत्मीय जुड़ाव सदैव रहा है:  माननीय राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके "

संघर्ष ही इतिहास रचता है। कोई भी व्यक्ति ऐसे ही बिना कर्म किए बड़ा नहीं होता या बड़े पद को सुशोभित नहीं होता :कुलगुरू प्रो इन्द्रप्रसाद तिवारी  

महानता किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती: प्राचार्य डॉ.अनिल जैन 

पीजी कॉलेज छिंदवाड़ा में सम्मान समारोह, पूर्व राज्यपाल अनसुइया उइके सहित दो कुलगुरुओं का हुआ सम्मान

उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा: प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा में शुक्रवार दिनांक 03 अक्टूबर को भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में माननीय पूर्व राज्यपाल सुश्री अनसुइया उइके जी,   राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा के कुलगुरु प्रो. इन्द्रकुमार तिवारी जी एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलगुरु माननीय प्रो. राजेन्द्र कुरारिया जी का महाविद्यालय परिवार द्वारा आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। महाविद्यालय में सम्मान समारोह के पूर्व अतिथियों ने महाविद्यालय विज्ञान संकाय की समस्त प्रयोगशाला का निरीक्षण किया। इस दौरान प्राचार्य डॉ. अनिल जैन ने अतिथियों को लैब की सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उसके पश्चात पुराने महाविद्यालय के परिषर में भव्य स्वागत ' अभिनंदन किया गया कक्ष क्र 37 में भारतीय ज्ञान परंपरा का निर्वहन करते हुए ईश वंदना के रूप में मां सरस्वती जी की पुष्प '  माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर ईश बंदना की गई । ततपश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल जैन एवं महाविद्यालय के समस्त वरिष्ठ प् प्राध्यापकों के द्वारा सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह , शाल श्रीफल से भेंट कर स्वागत किया गया। डॉ . पी एन  सनेसर एवं डॉo गोपीवाला डेहरिया द्वारा अतिथियों का प्रेरणादायी परिचय प्रस्तुत किया गया । 


समारोह अत्यंत महत्वपूर्ण रहा जिसमें राज्यपाल माननीय सुश्री अनसूया उनकी जीने अपने संबोधन में कहा - "यह समारोह केवल एक व्यक्ति के सम्मान का अवसर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, ज्ञान, नेतृत्व और समाज निर्माण जैसे आदर्श मूल्यों का सम्मान है, जिनसे हमारा राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है। व्यक्तित्व की सराहना - उन्होंने मंच पर उपस्थित कुलगुरुओं के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वे कितने सौम्य तरीके से अपने विचार रखते हैं। उनके एक-एक शब्द को जीवन में उतारने योग्य बताया और उनके *'सेवा संकल्प' और 'जनसेवा'* के अभियान को महत्वपूर्ण बताया। कॉलेज से आत्मीय जुड़ाव -उन्होंने कहा कि इस कॉलेज के साथ मेरी यादें हमेशा जुड़ी हैं, जिसे मैं कभी नहीं भुला पाई। चाहे मैं कितने भी बड़े पद पर रही, मैंने कॉलेज आना कभी नहीं छोड़ा। स्नेह और सम्मान - कहा कि मैंने भी जीवन में कहीं न कहीं इन अच्छे विचारों को ग्रहण किया है, शायद इसीलिए आज आप सब लोगों के बीच जो स्नेह, आत्मीयता और सम्मान मुझे मिलता है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।अपने उद्बोधन में पूर्व राज्यपाल अनसुइया उइके जी ने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों का सम्मान है और इस महाविद्यालय से उनका आत्मीय जुड़ाव सदैव रहा है। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा, नई शिक्षा नीति एवं महाविद्यालय के विकास को लेकर चर्चा की गई। अतिथियों ने अपने उद्बोधन में महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति की सराहना की।प्रो. इन्द्रकुमार तिवारी जी (कुलगुरु, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय) न  ने कहाँ - कि कोई भी व्यक्ति ऐसे ही बिना कर्म किए बड़ा नहीं होता या बड़े पद को सुशोभित नहीं होता उसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का निर्वहन तथा तटस्थ  होकर अपनी निरंतर लगन से कार्य को परिणाम तक पहुंचाना होता है। " उन्होंने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए छात्र-छात्राओं को सफलता  प्राप्त करने के साधनों के साथ-साथ सफलता में आवश्यक प्रेरणादाई नियमों को ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया ।" उन्होंने मंचासीन अतिथियों के संघर्ष का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए छात्र-छात्राओं को प्रेरक उद्बोधन से संबोधित किया । साथ ही सफलता की कहानियों के माध्यम से छात्रों को प्रेरित किया । कुलगुरु माननीय प्रो. राजेन्द्र कुरारिया जी ने भावुक उद्बोधन मे कहा  -  उन्होंने कहा कि जो लोग मुझसे पहले से यहाँ उपस्थित हैं, उनके नाम और चेहरे मुझे आज भी याद हैं। यह कॉलेज से उनका पुराना नाता है।*गुरु के गर्व का क्षण — एक गुरु के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण कुछ नहीं होता कि उसका ही पढ़ाया हुआ विद्यार्थी आज उसी के सामने शिक्षक बनकर बैठा हो। गुरु की महत्ता प्रतिपादित की ।उन्होंने  विद्यार्थियों को गुरु के गुरुत्व शक्तियां के महत्व को बताते हुए गुरुओं के सम्मान हेतू प्रेरित किया । 


महाविद्यालय की प्राचार्य डॉक्टर अनिल जैन ने अपने स्वागत उद्बोधन में समस्त अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका अभिवादन एवं अभिनंदन किया और अतिथियों की  सफलता की मिसाल को अभिव्यक्त करते हुए उनके कर्मों की और संबोधित करते हुए उनकी सरल सहज व्यक्तित्व की और महाविद्यालय में सहज रूप से अपनी उपस्थिति देने के लिए उनकी सराहना की ! कहा महानता किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती । महाविद्यालय परिवार की ओर से डॉ. पी एन सनेतर ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं एवं NCC केडिटस की गरिमामय उपस्थित ने कार्यकृम को सफल बनाने में सहयोग दिया ।

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