मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
राजा शंकरशाह का बलिदान दिवस समारोह
बलिदान की स्याही से वतन का इतिहास लिखा जाता है": कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी
वतन पर जान न्योंछावर करना शहीद सौभाग्य समझते हैं": प्रो. अमर सिंह
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा: राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा द्वारा अपने शिक्षण संस्थान शासकीय विधि महाविद्यालय काराबोह में महाराजा शंकरशाह एवं उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह बलिदान दिवस पर आयोजित समारोह की मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ व मणिपुर की पूर्व राज्यपाल महामहिम अनुसुइया उइके ने कहा कि राष्ट्र की खातिर खाक में मिलने की तमन्ना कोई राजा शंकर शाह से सीखे। बलिदानियों के पद चिन्ह समूची कौम के लिए मार्गदर्शी पथ होते हैं। मातृभूमि की रक्षा से बढ़कर और कोई तप नहीं होता है। बलिदानियों के जीवन से प्रेरणा लेकर मानवता गौरवान्वित महसूस करती है। कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य में कहा है कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने अपने बलिदान की स्याही से वतन का इतिहास रचा है। उनकी शहादत में ही हमारी हिफाजत है। भारत ने शहीदों के लहू से इंकलाबी परिवर्तन देखे हैं। बलिदानियों के पदचिन्हों पर चलकर भावी पीढ़ी को गर्व महसूस होता है।
मुख्य वक्ता प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय चांद प्रो. अमर सिंह ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान जनजातीय गौरव का बोध कराता है। उन्होंने अपने प्राणों की बलि देकर यह साबित किया कि जीने के पीछे जब राष्ट्रीय वजह होती है तो अपनी निजी चाहतों को सूली पर चढ़ाना पड़ता है। वतन पर जान लुटाने का सौभाग्य सभी का नहीं होता है। समारोह का मंच संचालन करते हुए डॉ. रूपल मिश्रा ने राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की क्रांतिकारी कविताओं का कुशल वाचन किया। आभार व्यक्त प्रो. जगदीश कुमार वाहने ने किया। इस अवसर पर प्रभारी कुल सचिव दशरथ सिंह गौर, प्राचार्य प्रो. कमलाकर मोटघरे और प्रो. सीताराम शर्मा की विशेष उपस्थिति रही।

