मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
माटी के गणेश में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
श्रीगणेशोत्सव में भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है भक्तिगंगा परिवार
परिवार द्वारा पिछले 60 वर्षों से सादगीपूर्ण निभाई जा रही श्री गणेश स्थापना की शाश्वत परंपरा
उग्र प्रभा समाचार,छिन्दवाड़ा: जिले के युवा फाइन आर्टिस्ट एवं सनातन संस्कृति के संवाहक पं. स्पंदन आनंद दुबे वर्ष 2001 से लगातार 25 वर्षों से बिना सांचे के माटी से शास्त्रोक्त गणेश प्रतिमाओं का निर्माण स्वयं करते आ रहे हैं। प्रतिमा निर्माण के रजत वर्ष में इस बार दशभुजी आद्यमूर्ति श्री ब्रह्मणस्पति महागणपति की पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा निर्मित कर स्थापित की गई है। प्रतिमा निर्माण में प्राकृतिक माटी एवं रंगों के साथ पंचामृत, पंचगव्य, पंचपल्लव, पंचरत्न, पंचधातु, नीमसत्व, कुशा, सप्तकाष्ठ, दूर्वासत्व, बिल्वसत्व, जपाकुसुम, समुद्र की रेत, गंगाबालू, तीर्थोदक जल, समुद्रजल, कौड़ी, गुंजा, मूंगा रत्न, शंख-सीप, कपूरजल, अर्क की जड़, सप्तमृत्तिका, सप्तधान्य, सर्वौषधि, सप्त लघुनारियल, दक्षिणा, अक्षत, कपूर, फिटकरी एवं गुलाबजल आदि प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया गया है।
पं. दुबे के अनुसार माटी गणेश निर्माण की प्रेरणा उन्हें उनकी मातामही दादी पूज्य गंगा देवी दुबे से मिली। पूर्व वर्षों में षड्भुजी हेरम्ब एवं अष्टभुजी महागणपति के शास्त्रोक्त स्वरूप भी निर्मित किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक माटी, औषधियों और बीजों से निर्मित प्रतिमा का विसर्जन जल प्रदूषण को कम करने के साथ मिट्टी में बीजों के माध्यम से नए जीवन के अंकुरण का संदेश भी देता है। अनंत चतुर्दशी में हवन-पूजन उपरांत श्री विग्रह का घर आंगन में ही विसर्जन पात्र में जलविलय किया जाकर प्राप्त पावन माटी में कमल पौधों का रोपण किया जाता है। आस्था और पर्यावरण संरक्षण के इस संगम के दर्शन श्री जगन्नाथ आराधना स्थली, विजय आनंद दुबे के निवास, वर्धमान सिटी, पाठा ढाना, चंदन नगर, छिन्दवाड़ा में किए जा सकते हैं।
