मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
तुलसी वेद और सनातन धर्म को समझ पाए इसलिए लोकमंगल के कवि कहलाए - प्रो उर्मिला खरपूसे
रामचरित मानस परिवार , समाज ,राज्य को व्यवस्थित करने का महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं: डॉ. राजेन्द्र मिश्र -
रामचरित मानस को सुनने के साथ गुनना आवश्यक है, मानवीय मूल्यों को संरक्षित करता है रामचरित मानस: डॉ० सुशील व्यौहार
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा :प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय समिति स्नातकोत्तर महाविद्यालय छिंदवाड़ा के हिंदी एवं प्रयोजनमूलक हिंदी विभाग द्वारा दिनांक 19 अगस्त 2026 को प्राचार्य डॉ. लक्ष्मीचन्द के निर्देशन ' विभागाध्यक्ष डॉ. उर्मिला खरपूसे के मार्गदर्शन डॉ. सीमा सूर्यवंशी के संयोजन एवं संचालन , डॉ. टीकमाणि पटवारी के आभार प्रदर्शन में तुलसीदास जयंती का आयोजन किया गया । प्रो उर्मिला खरपूसे ने अपने वक्तव्य में कहा - तुलसी वेद और सनातन धर्म को समझ पाए इसलिए लोकमंगल के कवि कहलाए । धर्म वह है जिसको धारण किया जाता है । धर्म के तीन रूप - साधारण धर्म - विशिष्ट धर्म , आपद धर्म , व्यक्ति के तीन रूप - गुलाब की तरह ' आम ' कठहल की चर्चा की । धर्म के चार चरण सत , सोच , दया , दान इनका गुणगान ही तुलसी की लोकमंगल की भावना है।
डॉ. राजेन्द्र मिश्र - तुलसी लोकमंगल के कवि है समाज राज्य के व्यवस्थित करने महत्वपूर्ण ग्रंथ रामचरित मानस हैं । तुलसी आज भी प्रासंगिक है।
डॉ० सुशील व्यौहार - रामचरित मानस को सुनने के साथ गुनना आवश्यक है। स्वाध्याय के साथ मनन चिंतन की आवश्यकता है। मानवीय मूल्यों को संरक्षित करता है रामचरित मानस ।
डॉ. रजनी कवरेती - तुलसी का जीवन शिक्षा की पाठशाला है।
डॉ टीकमणि पटवारी समय और स्थान का महत्व होना आवश्यक है।भारतीय ज्ञानपरम्परा का निचोड़ है रामचरितमानस ।
सागर भनोत्रा _ रामचरित मानस आदर्श परिवार और आदर्श राज्य की स्थापना है।
रचना लारिया - कवितावली आदर्श से यथार्थ का वर्णन है। रामराज्य की सुन्दर कल्पना का काव्य है। कलि के काल का वर्णन है ।
श्रीकान्त डेहरिया - तुलसी मात्र कवि नहीं वाल्मिकी अवतार है। उन्होंने 18 पुराण चार वेर 6 सात्र को अपने साहित्य में सार रूप में रखा ।
शैल कुमारी धुर्वे - छात्र छात्राओं को तुलसी साहित्य से जीवन को धर्म मर्यादा ' प्रेम करुणा कर्तव्य त्याग से पूर्ण बनाना होगा ।
हर्षुल रघुबंशी - हमारी संस्कृति व कर्तव्य निभाने का जिम्म्मा हमे अपने कन्धों में उठाकर चलना होगा । छात्र -छात्राओं में अमन डेहरिया (एम ए हिन्दी ) ने सस्वर गायन , रूपेश शुक्ला सस्वर नवधा भक्ति गायन (एम ए हिन्दी ) ' नेहा बंसोड़ (बी . ए प्रथम ) कृतित्व पर विचाराभिव्यक्ति , कामिनी सूर्यवंशी ( एम ए हिन्दी ) केवट प्रसंग , नन्दनी भारध्वज - तुलसी जीवन से सीख पर अपने विचार प्रस्तुत किया । समस्त प्रो शैलेष बांगड़े एवं समस्त प्राध्यापकों एवं छात्र छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनने में योगदान दिया ।

