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बदरवा बरस पड़ो चहुँ ओर- नंदकुमार दीक्षित

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 .         मोहिता जगदेव

     उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

जैसे दुर्गावती हो दुर्गा को अवतार.. अवधेश तिवारी

मन वृंदावन बन जाए तो क्या बात है-  - रत्नाकर रतन

कविता में मुक्त छंद का अर्थ छंद- मुक्त होना नहीं है-  

सुरेंद्र वर्मा

मरता नहीं कभी कलमकार- एस.आर. शेंडे

कारे मेघा पानी दे--रामलाल सराठे

बैरन के केशों में उलझे पिया- प्रीति जैन शक्रवार

 प्यारी-प्यारी गौरैया-मोहिता जगदेव

मौसम बदल रहा है हम भी बदल रहे हैं-   शशांक दुबे

आईने से प्यार करना सीखिए-भोले नेमा 'चंचल'

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा: वीरांगना महारानी दुर्गावती और प्रख्यात साहित्यकार नागार्जुन की आगामी जयंतियों के उपलक्ष्य में  संकटमोचन हनुमान-मंदिर नरसिंहपुर-रोड, छिंदवाड़ा के भव्य परिसर में आंचलिक साहित्यकार- परिषद,छिंदवाड़ा की  मासिक काव्यगोष्ठी संपन्न हुई। इस दिन पितृ- दिवस का भी आयोजन था तथा पुरुषोत्तम-मास का समापन भी हो रहा था, अतः मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस गोष्ठी का सरस संचालन परिषद के जाने-माने कवि श्री अंकुर वाल्मीकि और भोले नेमा 'चंचल' ने किया। 'मोह के बंधन खुले अब ज्ञान दे विज्ञान दे.. इन शब्दों से वाणी की देवी सरस्वती का अर्चन श्री नंदकुमार दीक्षित ने किया तथा शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् की स्तुति के साथ सबसे पहले श्री राजेंद्र यादव ने 'पिता कहां कुछ कह पाता है..एक पिता की चिंता पर अपनी कविता प्रस्तुत की ।वरिष्ठ कवि श्री लक्ष्मण प्रसाद डेहरिया ने सामाजिक संबंधों की विडंबनाओं  पर केन्द्रित रचना 'कतार में हम भी कतार में तुम भी' प्रस्तुत की तथा श्री दीपक कुमार अग्रवाल ने 'बच्चों का बचपन मत छीनो' का संदेश दिया।  श्री इंद्रजीत सिंह ठाकुर ने 'मोहन के रंग में रँगा सरस गीत प्रस्तुत किया और श्रीमती मोहिता जगदेव ने 'मां के प्यार, पिता के दुलार तथा दादाजी की छड़ी की बात  लोकभाषा के सौंधे स्वाद के साथ की।


अमरवाड़ा से पधारे श्री भोले नेमा 'चंचल' ने प्रश्न पूछा कि क्या तुमने कभी किसी का दिल छुआ है? वरिष्ठ साहित्यकार श्री सुरेंद्र वर्मा ने कवि नागार्जुन को भाव- सुमन समर्पित करते हुए नवगीत पर सार्थक जानकारी दी तथा श्री रत्नाकर रतन ने 'यातना सुगंध हो गई... गीत से अपनी स्वरलहरियॉं बिखेरी। कवि शशांक दुबे ने अपनी  अर्थगर्भित पंक्तियां प्रस्तुत की- 'मौसम बदल रहा है हम भी बदल रहे हैं.. और प्रीति जैन शक्रवार ने सरस विरहगीत प्रस्तुत करके वातावरण में करुण रस घोल दिया।। कवयित्री हिना ख़ान कहती हैं- मुकरना अपनी बातों से मुझे भी क्यों नहीं आता?' और श्री अंकुर वाल्मीकि ने अपना व्यंग्य- आलेख सुनाया जिसके केंद्रीय भाव थे,  आत्महत्या कायरता है। सौसर से पधारे वरिष्ठ कवि श्री एस.आर.शेंडे ने अपनी कविता के माध्यम से कहा- कविता सोया हुआ ज़मीर जगाती है ।' नंदकुमार दीक्षित जी ने अच्छी वर्षा के लिए बादलों की मनुहार की। पाठ्य पुस्तकों में पढ़े जाने वाले जाने- माने बालकवि श्री पी.दयाल श्रीवास्तव जी ने वीरांगना दुर्गावती जी की आगामी जयंती पर शब्द-सुमन समर्पित किए श्री रामलाल सराठे ने 'कारे मेघा पानी दे.. गीत सुना कर काले मेघों से ठंडी फुहारों की याचना की । वरिष्ठ कवि श्री आर एस. परिहार जी ने अपने कुछ सार्थक पंक्तियां प्रस्तुत की तथा  संजय जी ने 'मित्रता को जीवन का राग कहकर अपनी कविता की अभिव्यक्ति की।  कार्यक्रम के अंत में परिषद के अध्यक्ष अवधेश तिवारी ने वीरांगना दुर्गावती जी के प्रति 'जैसे दुर्गावती हो दुर्गा को अवतार गीत.. स्थानीय बोली में यह गीत प्रस्तुत करते हुए गोष्ठी का समापन किया तथा अंत में गोष्ठी के वरिष्ठ संरक्षक श्री एस.डी.ए. तिवारी जी के सुपुत्र के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए परिषद की ओर से उनके परिवार को संवेदना-पत्र सौंपा गया। परिषद के सचिव श्री रामलाल सराठे ने संकट मोचन-मंदिर की प्रबंधन- समिति तथा सभी उपस्थित साहित्यकारों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

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