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प्राकृतिक सौंदर्य की गोद में बसा आस्था का केंद्र — शारदा माई सालीवाड़ा मंदिर, अमरवाड़ा

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 प्राकृतिक सौंदर्य की गोद में बसा आस्था का केंद्र — शारदा माई सालीवाड़ा मंदिर, अमरवाड़ा  


अमरवाड़ा (छिंदवाड़ा)उग्र प्रभा 

 जिले की अमरवाड़ा तहसील से लगभग 7 किलोमीटर दूर सालीवाड़ा की पहाड़ी पर स्थित मां शारदा देवी का मंदिर क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष श्रद्धा का विषय है, यही कारण है कि इसे “छोटा मैहर” के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचकर मां शारदा के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगते हैं।

मंदिर का परिचय 


पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहले केवल पगडंडी मार्ग से पहुंचा जा सकता था। वर्ष 1972 में एनएसएस के छात्रों द्वारा यहां पक्की सीढ़ियों का निर्माण कराया गया। इसके बाद वर्ष 1991 में मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिली। वन विभाग द्वारा आसपास के क्षेत्र में व्यापक वृक्षारोपण भी किया गया, जिससे यह स्थल और अधिक रमणीय बन गया।

इतिहास और मान्यता

मंदिर के निर्माण को लेकर एक प्रचलित कथा के अनुसार, अनुसूचित जनजाति के पंचम पंडा नामक व्यक्ति को माता रानी ने स्वप्न में दर्शन देकर इस स्थान पर विराजमान होने की इच्छा जताई थी। माता की आज्ञा का पालन करते हुए पंचम पंडा सैकड़ों किलोमीटर दूर मैहर से मां शारदा की प्रतिमा अपने कंधे पर लाकर यहां स्थापित की। तभी से यह स्थान एक प्रमुख शक्ति पीठ के रूप में विकसित हुआ।

भव्य मेले की परंपरा

करीब तीन दशक पूर्व यहां ब्रह्मलीन जगतगुरु स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज की उपस्थिति में अत्यंत विशाल मेला आयोजित हुआ था, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। उस समय मेले की स्थिति इतनी भव्य होती थी कि दूर-दराज से आए लोगों को पानी तक के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।

प्रसिद्ध भजन गायिका शहनाज अख्तर ने भी अपने शुरुआती दौर में यहां प्रस्तुति दी थी, जिसे मां शारदा का आशीर्वाद माना जाता है।

पूर्व में यह मेला लगभग 15 दिनों तक चलता था, जिसमें सैकड़ों दुकानें लगती थीं—सोना-चांदी के आभूषण, किराना, भोजनालय, मनिहारी, इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने, आइसकैंडी, बर्फ के गोले आदि। साथ ही सर्कस, रामलीला, “मौत का कुआं” और विभिन्न प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहती थीं।

वर्तमान स्थिति

कोरोना काल के बाद इस मेले का स्वरूप कुछ सीमित हो गया है। जहां पहले जनपद पंचायत अमरवाड़ा द्वारा बड़े स्तर पर मेला आयोजित किया जाता था, वहीं अब ग्राम पंचायत और शारदा माई मेला समिति द्वारा 10 दिवसीय मेला आयोजित किया जाता है, जो पंचमी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक चलता है।

धार्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भजन संध्या, धार्मिक अनुष्ठान और ज्वारे विसर्जन जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होते हैं। वर्षों से इस मेले में शंकराचार्य, सांसद, मंत्री, विधायक सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों का आगमन होता रहा है।

जन अपेक्षा

स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक मेले को पुनः पूर्व की भव्यता के साथ बड़े स्तर पर आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था को और अधिक बढ़ावा मिल सके।

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