मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
चांद कालेज की अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य समापन
भारत का शास्त्रीय ज्ञान वैश्विक अशांति की औषधि है ': प्रो. वाय. लाल. टेखरे कनाडा
भारत व मलेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत है": प्रो. पॉल जानसेल्वम मलेशिया
"भारत व फिलीपींस के रिश्तों की बुनियाद सांस्कृतिक है": ": डॉ.जैसी. लेन. एस्टेरा फिलिपीन्स
"भारत व बांग्लादेश में शास्त्र परम्परा का प्राचीन गौरव है": प्रो. इलहाम हुसैन ढाका सिटी ग्रीन विश्वविद्यालय
भारत व नेपाल की सांस्कृतिक विरासत लोकहित में है ": प्रो. अमर सिंह
उग्र प्रभा समाचार ,चांद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में भारतीय शास्त्र परंपरा पर आयोजित द्विदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में कनाडा के आप्रवासी भारतीय समाजशास्त्री प्रो. वाय. एल. टेखरे ने कहा कि भारत का शास्त्रीय ज्ञान दर्शन वैश्विक अशांति की औषधि है। मलेशिया के अकादमिक लेखकों प्रो. पॉल जानसेल्वम ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत और मलेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत की जड़ें भारतीय शास्त्र परंपरा में सन्निहित हैं। फिलिपींस की डॉ. जैसी लेन एस्टरा ने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परम्परा का उनके राष्ट्र मके जीवन मूल्यों पर एक अच्छा प्रभाव है। ढाका ग्रीन सिटी विश्वविद्यालय बांग्लादेश के प्रो. इलहाम हुसैन ने भारत बांग्लादेश के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने में भारतीय शास्त्रों के कई उद्धरण पेश किए। नेपाल के प्रो. गुलजार राउत ने अपने वक्तव्य में दोनों देशों के बीच धार्मिक, भाषिक व ऐतिहासिक संबंधों के संदर्भ प्रस्तुत किए। जेएनयू के प्रो. शान्तेश कुमार सिंह ने विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति की प्रभाव, जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी इस्लामिया नई दिल्ली के प्रो. सत्य प्रकाश भारतीय व यूरोपीय भाषाओं के बीच स्थापित अंतर्संबंधों व दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के प्रो. प्रवीण कुमार अंशुमान ने प्राचीनता व नवीनता के बीच समन्वय से आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से उत्कृष्ट परिणाम हासिल करने के सूत्रों पर प्रकाश डाला।
मेरठ विश्वविद्यालय से प्रो. विकास शर्मा ने भारतीय शास्त्र परम्परा में संचित ज्ञान निधि, मुंबई विश्वविद्यालय के प्रो. शिवाजी सरगर ने भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में मौजूद ज्ञान के खजानों और नई दिल्ली के लेखक व नागरी लिपि परिषद के महामंत्री हरी सिंह पाल ने भाषिक शुद्धता की शुचिता से सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने पर प्रकाश डाला। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. जय शंकर झा ने भारतीय शास्त्रों में वर्णित दर्शन से जीवन प्रबंधन करने। आर. बी. एस. कॉलेज आगरा के प्रो. ए. के. सिंह ने नई शिक्षा नीति में प्राचीन शास्त्र परंपरा की विरासत से शिक्षा को वैज्ञानिक बनाने और केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी बिहार के प्रो. बबलू पाल ने भारत के युगीन सांस्कृतिक वैभव से वर्तमान समय की शैक्षिक चुनौतियों से निपटने पर अपना व्याख्यान दिया। अतिरिक्त संचालक प्रो. पी. आर. चंदेलकर ने भारतीय ज्ञान परंपरा में बुद्ध दर्शन व अमरवाड़ा कॉलेज के प्राचार्य प्रो. शिवचरण मेश्राम नई उच्च शिक्षा में सेमिनारों के प्रबोधन से शैक्षिक गुणात्मकता सुधार पर वक्तव्य दिया। संयोजक प्रो अमर सिंह ने कहा कि भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत वैश्विक हित में है। समापन समारोह को प्रो. ए. एन. के. राव, प्रो. अजय सिंह ठाकुर, प्रो. ज्योति सूर्यवंशी, प्रो. जी. एस. आर. नायडू व रविंद्र कुशवाह ने भी संबोधित किया। इस कांफ्रेंस में देश विदेश के विभिन्न 250 शोधार्थियों, 50 भारतीय रिसोर्स पर्सन और 5 विदेशी रिसोर्स पर्सन ने अपने वक्तव्य ऑनलाइन/ऑफलाइन माध्यम से दिए। प्रो. रजनी कवरेती व प्रो. जी. एल. विश्वकर्मा के साथ शासकीय महाविद्यालय चांद के समस्त स्टाफ ने भरपूर सहयोग दिया।

