मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
चौरई कॉलेज के रा.से.यो. शिविर का भव्य उद्घाटन ग्राम सीतापार में
जिज्ञासा जीवन को अनंत गहराई में उतारती है: प्रो. अमर सिंह
" जब ठान लेते हैं तो कुछ भी मुश्किल नहीं रहता है": प्रो. मुकेश कुमार ठाकुर
उग्र प्रभा समाचार,चौरई, छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चौरई के सात दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर में बौद्धिक चर्चा में मुख्य अतिथि बतौर बोलते हुए चांद कालेज के प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने स्वयंसेवकों को जीवन प्रबंधन के सबक देते हुए कहा कि रा.से.यो. राष्ट्रसेवा के साथ आत्मोत्थान का वह सरलतम जरिया है जिससे जुड़कर छात्र शैक्षिक अवदान के साथ स्वस्थ चरित्र निर्माण, आचरण की शुचिता व व्यावहारिक जीवन की यथार्थता के रहस्य जान सकते हैं। शिक्षा प्राप्ति सिर्फ़ कृत्रिम वाह्य दिखावा बनकर न रह जाए, इसलिए रा.से.यो. का मंच छात्रों को जीवन के मुद्दों की गहरे से पड़ताल करता है। कर्म यज्ञ ही जीवन में हर पल जीने की कला है। छात्र अपनी इच्छा शक्ति को ब्रह्मास्त्र की तरह इस्तेमाल कर राष्ट्र पुनर्निर्माण के घटक बनें, न कि अकर्मण्यता, अफ़सोस व पश्चाताप के जनक। अपनी अंतर्निहित तमाम खूबियों को पंख लगाना ही राष्ट्र की सच्ची सेवा है। हमारे संचित कर्म ही हमारा भाग्य बनाते हैं, अतः कर्म करने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए। भारत अर्पण की धरती है यह तर्पण मांगती है। छात्र वर्तमान में कर्मठ बनकर वक्त के सांचे बन सकते हैं। भाग्य के दरवाजे पर सिर पीटने से नहीं बल्कि कर्मों के तूफ़ान उठाने वाले को विजयश्री अवश्य नसीब होती है। जो त्रासदी में भी सुअवसर ढूंढ लेता है, वह कभी हार का सामना नहीं कर सकता है। अगर हमारे इरादे फौलादी हैं तो श्रम की बर्बादी की गुंजाइश नहीं बचती है। जब तक कर्ता कर्म को अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंचाता है, तो फायदा स्वयं को नहीं, औरों को मिलता है। लक्ष्य के सिवा और कुछ दिखना वक्त, शक्ति व श्रम की फिजूलखर्ची है। जिज्ञासा जीवन को गहराई में उतारती है। नकारात्मक रवैया रचनात्मक ऊर्जा को चूस लेता है। भाग्य पर भरोसा बहानेबाजों की धार्मिक आड़ होती है।
सफलता भाग्य के द्वार पर सिर पीटने से नहीं मिलती है": प्रो. अमर सिंह
प्राचार्य प्रो. मुकेश ठाकुर ने कहा कि अस्पष्ट, अपरिपक्व अव्यावहारिक विचारों की आंधी में उड़कर युवा अपनी जवानी न गवाएं। ठान लेने वाले लोग क्या मुश्किल है और क्या आसान है, में अंतर नहीं करते हैं। कार्यक्रम अधिकारी प्रो. चंद्रशेखर उसरेठे ने कहा कि फौलादी इरादों से उत्पन्न उत्कृष्ट विचार ऊर्जा व्यक्ति से दुर्लभ कार्य करवा देती है। विषमताओं को क्षमताओं में बदले बिना कोई भी सिद्धि प्राप्त नहीं होती है। प्रो. विकास शर्मा ने कहा कि महानता वक्त की निचोड़ी बूंद पर कर्मों का निवेश करने से प्राप्त होती है। बेशुमार कर्मशील ही अकूत सत्ता, दौलत व सुकून के भागीदार बनते हैं। लक्ष्मीकांत डहरवाल ने कहा कि साहसी के समक्ष विलासी सुविधाएं बौनी पड़ जाती हैं। विलासिता संभावनाओं को विकसित नहीं होने देती है।

