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एक सुकरात रूपी शिक्षक सैकड़ों सिकंदर पैदा कर सकता है": पद्मश्री उमाशंकर पांडे

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       मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा 

भारतीय ज्ञान परंपरा से सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का भव्य उद्घाटन

"आज जीवन बीमा नहीं, जल बीमा की जरूरत है": पद्मश्री उमाशंकर पांडे

" रासायनिक खाद के नाम पर खेतों में जहर बोया जा रहा है": पद्मश्री उमाशंकर पांडे 

उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा: आईपीएस कॉलेज छिंदवाड़ा व राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा द्वारा संयुक्त रूप से " सतत विकास के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा: विकसित भारत -2047 के लिए दिशा निर्देश" विषय पर एफडीडी आई सभागृह में आयोजित  अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में प्रमुख वक्ता बतौर बोलते हुए पर्यावरणविद् पद्मश्री उमाशंकर पांडे ने जल ही जीवन है, की  सार्वभौमिक, सार्वकालिक और सार्वजनिक उपयोगिता को रेखांकित करते हुए कहा कि सतत विकास हेतु जीवन बीमा नहीं, जल बीमा की नितांत आवश्यकता है। घर का पानी घर में और खेत का पानी खेत में ही रहना चाहिए। हर खेत पर मेड़ और हर मेड़ पर पेड़ लगाने चाहिए। रासायनिक खाद के नाम पर खेतों में जहर बोया जा रहा है। शिक्षकों को जल साहित्य पर शोध कराना चाहिए। हर शिक्षक सुकरात होता है, सिकंदर एक सुकरात नहीं बना सकता है लेकिन एक सुकरात कई सिकंदर बना सकता है। कुलगुरू प्रो. आई. पी. त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय शास्त्र परंपरा में सतत विकास के लिए वानस्पतिक संरक्षण पर हजारों संदर्भों से बात की गई है। मुख्य स्त्रोत वक्ता बी.एच.यू. के प्रो. बी. रामानाथन ने कहा कि इस सृष्टि में कोई भी शब्द, व्यक्ति या वनस्पति बेकार नहीं है, सिर्फ उनकी उपयोगिता बताने वाला कोई विशेषज्ञ चाहिए। दिल्ली के प्रो. कामेश सतीश पवार ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान की संस्कृति है, इसमें तकनीकी दक्षता को जोड़कर भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाया जा सकता है।


अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा प्रो. पी. आर. चंदेलकर ने कहा कि भारत के ज्ञान कोष की विरासत के क्रियान्वयन में ही आधुनिक भारत की समस्याओं का समाधान है। प्राचार्य प्रो. जैमिनी खानवे ने कहा कि पहले दुनिया बोलती थी, और भारत सुनता था। अब भारत बोलेगा और दुनिया सुनेगी। संयोजक प्रो. रणजीत झा ने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस भारत की अंतर्निहित सामर्थ्य को केंद्रित कर राष्ट्र के गौरव को सामने रखेगी। संरक्षक नरेंद्र पाल ने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस सनातन संस्कृति के विचार रूपी बीज का बीजारोपण करके भावी भारत की दिशा हेतु मार्गदर्शी साबित होगी। प्रो.अमर सिंह ने जैव विविधता संरक्षण पर मानवता के हितार्थ प्रकाश डाला। कॉन्फ्रेंस में तकनीकी मैनेजमेंट एडविन इनकॉरपोरेशन एवं विशेष सहयोग साउथ मैनेजमेंट एशिया एसोसिएशन ने दिया। मंच संचालन का निर्वहन अंकिता सिंह व रीतेश मालवीय ने किया।

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