प्रसिद्ध ब्रांड 'हल्दीराम' की सोनपापड़ी में निकलीं ज़िंदा इल्लियां;
समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने खाद्य विभाग से की शिकायत
छिंदवाड़ा/परासिया//उग्र प्रभा
शुद्धता का दावा करने वाले देश के प्रतिष्ठित ब्रांड 'हल्दीराम' की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। परासिया के स्टेशन रोड निवासी एवं प्रसिद्ध समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया द्वारा खरीदे गए हल्दीराम सोनपापड़ी के पैकेट में ज़िंदा इल्लियां और जाले रेंगते हुए पाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए चौरसिया ने मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, जिला छिंदवाड़ा को लिखित शिकायत सौंपकर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।
*क्या है पूरा मामला?*
समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने बताया कि उन्होंने 02 जनवरी 2026 को परासिया स्थित हल्दीराम के डिस्ट्रीब्यूटर (काले जी) से सोनपापड़ी के दो पैकेट खरीदे थे। एक पैकेट खोलने पर उसमें इल्लियां देखकर परिवार के सदस्य दंग रह गए। इसकी शिकायत तुरंत कंपनी के कस्टमर केयर पर की गई और साक्ष्य के रूप में फोटो व बैच नंबर ईमेल (customercare@haldiramcare.com) भी किए गए। चौरसिया का आरोप है कि कंपनी द्वारा इस गंभीर लापरवाही पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया और न ही कोई कार्यवाही की गई।
जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप:
विगत 16 वर्षों से समाज सेवा और मानव सेवा में सक्रिय रिंकू रितेश चौरसिया ने कहा, "हल्दीराम जैसे बड़े ब्रांड से जनता को शुद्धता की उम्मीद होती है, लेकिन इस तरह की लापरवाही आम आदमी की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है। यदि एक जागरूक नागरिक इस पर आवाज नहीं उठाएगा, तो ऐसी कंपनियां मासूम बच्चों और लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालती रहेंगी।"
खाद्य विभाग से की गई ये मांगें:
फूड सेफ्टी ऑफिसर गोपेश मिश्रा एवं पंकज कुमार घागरे खाद्य विभाग छिंदवाड़ा को दूषित सामग्री का सील पैक डब्बा और खुला हुआ डब्बा साक्ष्य के रूप में सौंपा है। जिसकी जांच हेतु इसकी विधिवत जब्त किया। और आश्वासित किया कि भोपाल लैब से शीघ्र अति शीघ्र भोपाल लैब से इसकी जांच करवा करके संबंधित के विषय कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि:
संबंधित दुकान और उस 'लॉट' (Batch) के नमूनों की तत्काल जांच हो।बाजार में बिक रहे उस दूषित बैच के सभी पैकेटों को तुरंत वापस (Recall) करवाया जाए।लापरवाही बरतने पर कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए।इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र के उपभोक्ताओं में रोष है और लोग खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सशंकित हैं।
