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"हिंदी हिंद की हृदय-सम्राट व राष्ट्र की प्राण-वायु है:" प्रो. अमर सिंह

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      मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

चांद कॉलेज में विश्व हिंदी दिवस पर व्याख्यान आयोजित 

हम हिंदी को अब राष्ट्रीय भाषा का दर्जा मिल जाना चाहिए :प्रो राजकुमार पहाड़े

हिन्दी की व्याकरणीय शुद्धता राष्ट्र की एकता में सहायक है": प्रो अमर सिंह 

हिन्दी को लोकज्ञता, सर्वज्ञता व लोकवार्ता की दरकार है": प्रो अमर सिंह 

उग्र प्रभा समाचार चांद: शासकीय महाविद्यालय चांद में राष्ट्रीय सेवा योजना, स्वामी विवेकानंद कैरियर निर्माण एवं हिंदी विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस पर "हिन्दी हिंद की हृदय सम्राट एवं प्राण वायु है" विषय पर आयोजित व्याख्यान में प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने हिंदी भाषा को भारत की सामासिक संस्कृति की रचनात्मक अभिव्यक्ति की धरोहर कहकर भारत राष्ट्र की हृदय सम्राट व प्राण वायु कहा। हिन्दी का व्याकरण सबसे शुद्ध व विज्ञान सम्मत होने के साथ विकासशील भाषा के रूप में हिंदी ने राष्ट्रीय एकीकरण की मिसाल बनाई है। लिपि व ध्वन्यात्मकता के कारण हिंदी आज विश्व पटल पर शोभित है। विश्व की 3500 भाषाओं में से हिंदी भाषी लोग 137 देशों में फैले हैं। बोलने वाले लोगों की संख्या की दृष्टि से हिंदी चीनी व अँग्रेजी के बाद तीसरे स्थान पर है। हिंदी में देश की एकता का मूलमंत्र छिपा है। भारत की आत्मा के रूप में हिंदी ने लोकज्ञता, सर्वज्ञता व लोकवार्ता का स्थान प्राप्त कर लिया है। विश्व हिन्दी सम्मेलनों का आयोजन सिर्फ एक रस्मअदायगी जलसा ही नहीं है, बल्कि सागर पार लघुभारत की स्थापनाऐं हैं। हमें भारतमाता की पहचान बनाए रखने के लिए अपनी मां, मातृभूमि व मातृभाषा हिंदी को गौरवमयी स्थान दिलाना होगा।


प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि संस्कृत की बेटी हिंदी को इसके पाठकों व मातृभाषियों से बड़ा खतरा है। हिंदी की शान बनी रहे, इसके प्रयास हम सभी को करने होंगे। प्रो. राजकुमार पहाड़े ने कहा कि वक़्त का तकाज़ा है कि हम हिंदी को अब राष्ट्रीय भाषा का दर्जा मिल जाना चाहिए। हिंदी के मुश्किल सफ़र को हिंदी भाषी लोग ही आसान बना सकते हैं। प्रो. सकरलाल बट्टी ने कहा कि हिन्दी के आत्मज्ञान के दिव्य प्रकाश से इसके बोलने वाले इसे देश की आन, बान और शान व देश की पहचान मानते हैं। प्रो . सुरेखा तेलकर ने कहा कि हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं है, बल्कि यह सृजन के भावों की अभिव्यक्ति है। प्रो . रक्षा उपश्याम ने हिन्दी को ज्ञान- विज्ञान की भाषा से ऊपर उठाकर रोज़गार की भाषा बनाने पर जोर देते हुए इसकी उपयोगिता बाज़ार में सिद्ध करने पर जोर दिया।





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