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उच्च शिक्षा कुपात्रता से निजात पाने की औषधि है": प्रो. अमर सिंह

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       मोहिता जगदेव

  उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा 

चांद कालेज द्वारा बालक उ. मा. शाला में कालेज चलो अभियान 

उच्च शिक्षा अपात्र को धुंधले ज्ञान की कुपात्रता से निकालकर पात्रता विकसित करती है : प्रो अमर सिंह 

मन, बुद्धि और चित्त का संयमीकरण ही अनुशासन होता है: प्रो लक्ष्मण उइके 

उग्र प्रभा समाचार,चांद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद द्वारा बालक उ. मा. शाला चांद में कालेज चलो अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट जीवन हेतु उच्च शिक्षा के महत्व पर बोलते हुए प्राचार्य प्रो. अमर सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा वृत्ति से भाग्योदय का पथ प्रशस्त होता है। उच्च शिक्षा अपात्र को धुंधले ज्ञान की कुपात्रता से निकालकर पात्रता विकसित करती है। शोधपरक अवधारणात्मक ज्ञान जीवन की तमाम उलझनों का समाधान है। प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि उच्च शिक्षा के विषय छात्रों में एकाग्रचित निष्ठा से सफलता के पायदान प्रदान करते हैं। प्रो . लक्ष्मण उइके ने कहा कि उच्च शिक्षा का ध्येय मनुष्य को अंतःकरण से अनुशासित करना है। मन, बुद्धि और चित्त का संयमीकरण ही अनुशासन होता है।


प्रो. सकर लाल बट्टी ने कहा कि अवधारणात्मक ज्ञान उच्च शिक्षा के केन्द्र में है जो मन की चंचलता, उत्तेजना और अशांति का इलाज करता है। शिक्षक राकेश मालवीय ने कहा कि उच्च शिक्षा में अध्ययन कर रहे छात्र अपनी बुद्धि संश्लेषण, विश्लेषण और विवेचन को अपने अधिगम का अभिन्न हिस्सा बनाकर ज्ञानार्जन करें।  प्राचार्य महेश कुमार रघुवंशी ने कहा कि छात्र अपने चित्त की संस्कार भूमि की मेधा से कैरियर निर्माण की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं। शिक्षक रघुनाथ वर्मा ने कहा कि आचार्य की निष्ठा से शिष्य की आत्मनिष्ठा का एकीकरण न हो पाना दीक्षा का बेपटरी होना है। शिक्षक अनिल तागड़े ने कहा कि बिना श्रद्धा पर टिका जीवन निष्फल रहता है।  पुरुषार्थ से भाग्योदय होता है, तत्पश्चात आत्म उत्कर्ष की प्राप्ति होती है।

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