मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा
छायावाद के स्तंभ सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि पर काव्य गोष्ठी आयोजित
पंत प्रकृति के मानवीकरण अलंकार के कवि हैं": सुरेंद्र वर्मा
" पंत की काव्य ध्वनि में प्रगतिशील दर्शन भरा पड़ा है": प्रो. अमर सिंह
उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा: छायावाद के स्तंभ सुमित्रानंदन पंत की पुण्यतिथि को अविस्मरणीय बनाने हेतु मध्यप्रदेश आंचलिक साहित्यकार परिषद द्वारा जवाहर कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला छिंदवाड़ा में आयोजित काव्य गोष्ठी में परिषद अध्यक्ष पूर्व आकाशवाणी उद्घोषक अवधेश तिवारी ने पंत को प्रकृति व नारी के सौंदर्य को एकीकृत दृष्टि प्रदान करने वाला कवि कहा। वरिष्ठ कवि सुरेंद्र वर्मा ने पंत को कोमल भावुक भाषा से प्रतिपूर्ण मानवीकरण अलंकार वाला गहन छायावादी कवि कहा। रतनाकर रतन ने पंत के काव्य को रहस्यवादी, वेदनाओं और स्वाभाविकता का मिश्रण बताया। प्रो. अमर सिंह ने पंत को ध्वन्यात्मकता, आत्मअभिव्यंजना, प्रगतिशील व दार्शनिक विचारधारा का कवि कहा। संस्था सचिव रामलाल सराठे ने पंत को "सजीव, मनोहारी व मानवीय संवेदनाओं का कुशल चितेरा", " राहुल चौरिया ने "अहम का पानी न चढ़े सर के ऊपर " एवं मोहिता मुकेश कमलेंदु ने पंत को" सुघड़ सौंदर्य अनुभूतियों से सुसज्जित बिम्ब प्रधान कवि बताया।
सौंसर के वरिष्ठ कवि एस आर शेंडे ने "नवजीवन सृजन करती कविता, श्रीमती अनु कामोने ने "तुम जो रूठे तो कयामत होगी " और ओमप्रकाश नयन ने "देना होगा एक दिन सम्मान" के मर्म को स्पर्श करती कविता पढ़ी।अशोक जैन ने "हमारे गुनाह तो मशहूर हैं, जमाने में", नंद किशोर दीक्षित ने "तुम्हारे शहर से अच्छी है, हमारे गांव की गलियां और हिना खान ने "बुझे जीवन में हो उजाला, ऐसा रोशनदान बन" के भावों से पूर्ण काव्य रचना पढ़ी। कवि राजेंद्र यादव ने "नववर्ष लिखेगा एक नूतन अध्याय" एवं श्रीमती ज्योति गुप्ता ने "अहंकार के बंधन तोड़ भगवान पाना जरूरी है"भाव से मार्मिक रहस्यवादी कविता पढ़ी। काव्य गोष्ठी में राजेंद्र कुमार सैनी, निर्मलकर, अंकुर बाल्मीकि, रमाकांत मौर्य एवं विश्वेष चंदेल ने भी अपने काव्य उद्गार व्यक्त किए।

