मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
विश्वविद्यालय स्तरीय युवा उत्सव सांस्कृतिक पक्ष की स्पर्धाएं संपन्न
" प्रतिस्पर्धा व्यक्ति का स्वयं से परिचय कराती है": कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी
उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा: राजा शंकरशाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा में आयोजित विश्वविद्यालयस्तरीय स्पर्धाओं के दूसरे दिन प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कुलगुरू प्रो. इन्द्र प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा व्यक्ति का स्वयं से परिचय कराती है। भारतीय संस्कृति में नैतिक मूल्यों के अकूत भंडार हैं, जिनसे जीवन को आलोकित किया जा सकता है। छात्र अपनी अभिरुचियों के अनुरूप क्षमताओं का प्रदर्शन कर कालेज जीवन में भविष्य के लिए कैरियर की दिशा निर्धारित कर सकते हैं। जिंदगी उम्मीदों का उत्सव है, निराशाओं का मातम नहीं। जिस घाव को दवा न भर सके, उसे नृत्य संगीत भर देते हैं। संगीत आत्मा पर लगी धूल साफ कर देता है। कुलसचिव प्रो. युवराज पाटिल ने नृत्य को सम्पूर्ण व्यायाम बताते हुए कहा कि ध्यान को एकाग्र करने में नृत्य की महती भूमिका है।
प्रो. अमर सिंह ने युवा उत्सव के प्रतिभागियों को अभिप्रेरित करते हुए कहा कि मुसीबतों से शख्सियत में निखार आता है। जहां शब्द मैदान छोड़ देते हैं वहां, संगीत मोर्चा संभाल लेता है। प्रो. धनाराम उइके ने कहा कि नाटक में संवाद और भावभंगिमाओं के बेजोड़ संगम से बेहतरीन प्रभाव छोड़ा जा सकता है। प्रो. जे. के. वाहने ने कहा मूक अभिनय में बिना शब्दों के जो अभिव्यक्ति दी जाती है, उसमें सांकेतिकता का बहुत महत्व है। प्रो. अंजली चौहान ने कहा कि युवा उत्सव की किसी भी विधा में महारत हासिल करने के लिए साधना की सतत आवश्यकता होती है। सांस्कृतिक पक्ष की समूह नृत्य, एकल नृत्य शास्त्रीय, एकांकी, मूक अभिनय, स्किट, और मिमिक्री की स्वर्धाएं संपन्न हुईं। सभी स्पर्धाओं में निर्णायकों की भूमिका का निर्वहन अशोक जैन, रामलाल सराठे, नेमीचंद व्योम, दीप चंचलेश, डॉ. शांतनु पाठक, राजकुमार चौहान, धीरेंद्र दुबे, विनोद तिवारी, श्रीमती प्रीति सक्सेना, सुश्री मंगला गजभिए एवं दुर्गेश उइके ने किया।

