मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
हिंदी दिवस विशेष
प्रस्तुति - सुश्री अंजुमन मंसूरी आरजू
हिंदी बिछा के सोऊँ, हिंदी ही ओढ़ती हूँ।
इस हिंदी के सहारे, मैं हिंद जोड़ती हूँ॥
मेरा मानना है कि कोई दिवस विशेष, किसी कमज़ोर विषय को सशक्त बनाने के उद्देश्य से होता है। हिंद में हिंदी की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। हिंदी हमारी मातृभाषा है, जो हमें हमारी संस्कृति और विरासत से जोड़ती है। यह हमारी पहचान और एकता का प्रतीक है। इसके बाद भी इसकी स्थिति में काफी सुधार की आवश्यकता है । हिंदी दिवस हमें अपनी भाषा के महत्व को समझने और इसके प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने का अवसर प्रदान करता है।हमें अपनी हिंदी भाषा को संवारने और बढ़ावा देने के लिए निरंतर इतने प्रयास करने चाहिए कि हिंदी दिवस मनाने की आवश्यकता न पड़े यानी हमारी मातृभाषा हिंदी इतनी सशक्त हो जाए कि यह राजभाषा से राष्ट्रभाषा का सफर तय कर अपनी मंजिल तक पहुंच सके ।
सुश्री अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'
साहित्यकार एवं शिक्षिका
शासकीय सांदीपनि विद्यालय मोहखेड़, छिंदवाड़ा
