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बहन के त्याग ने गढ़ी विजयगाथा, पांढुर्णा के विक्रमदेव सरयाम बने डिप्टी कलेक्टर”

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 “बहन के त्याग ने गढ़ी विजयगाथा, पांढुर्णा के विक्रमदेव सरयाम बने डिप्टी कलेक्टर”


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MPPSC 2024 में हासिल की 10वीं रैंक, बहन दीपा ने त्यागकर भाई को दी सफलता की राह – परिवार की साधारण पृष्ठभूमि से निकली असाधारण कहानी

समाचार//उग्र प्रभा (पादुंर्ना):

पांढुर्णा जिले के ग्राम गोविंदपुर का नाम अब इतिहास में दर्ज हो गया है। यहाँ के विक्रमदेव सरयाम ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) 2024 की परीक्षा में 10वीं रैंक प्राप्त कर डिप्टी कलेक्टर (DC) का पद हासिल किया है।यह उपलब्धि सिर्फ़ उनकी मेहनत की कहानी नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते के त्याग, संघर्ष और विश्वास की ऐसी मिसाल है जो हर युवा के लिए प्रेरणा बनेगी।

*किसान परिवार से निकलकर बड़ा मुकाम*


विक्रमदेव किसान पिता श्री देवराम सरयाम और  माँ  पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रामप्यारी सरयाम के पुत्र हैं। प्राथमिक शिक्षा गाँव में लेने के बाद उन्होंने छिंदवाड़ा के आदिवासी छात्रावास और उत्कर्ष विद्यालय में पढ़ाई की। बाद में भोपाल से स्नातक की डिग्री प्राप्त कर बड़े सपनों की राह पर आगे बढ़े।

*संघर्ष और असफलताओं से भरा सफर*

2018 से लगातार परीक्षा देते हुए वे कई बार असफल हुए। कभी एक अंक से प्री परीक्षा में बाहर हो गए, तो कभी इंटरव्यू तक पहुँचकर चयनित नहीं हो पाए। आर्थिक तंगी और असफलताओं ने उन्हें निराश कर दिया, यहाँ तक कि उन्होंने तैयारी छोड़ने का मन बना लिया।

*बहन का त्याग बना संबल*

इसी कठिन समय में उनकी छोटी बहन दीपा ने अपनी M.Sc. की पढ़ाई बीच में रोक दी और इंदौर में आईटी पार्क की प्राइवेट नौकरी ज्वाइन कर ली, ताकि भाई बिना चिंता के तैयारी कर सके। दिन-रात मेहनत, घर और नौकरी दोनों की ज़िम्मेदारी उठाते हुए दीपा ने भाई के सपनों को अपना लक्ष्य बना लिया।

*विक्रमदेव भावुक होकर कहते हैं*—

“आज अगर मैं डिप्टी कलेक्टर हूँ तो यह दीपा की वजह से हूँ। उसने अपने सपनों का बलिदान दिया, तभी मैं हार नहीं मान सका।”

सफलता और नई शुरुआत

2022 में उनका चयन आबकारी उपनिरीक्षक के रूप में हुआ। फिर भी उन्होंने अपने सपनों को थामा रखा और 2024 में शानदार सफलता के साथ डिप्टी कलेक्टर बने। अब उनकी बहन दीपा भी भाई से प्रेरणा लेकर MPPSC की तैयारी कर रही हैं।विक्रमदेव और दीपा की यह कहानी सिर्फ़ प्रशासनिक सफलता की नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की अनमोल ताक़त और त्याग का जीवंत उदाहरण है।

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