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कृष्ण दर्शन जीवन की पूर्ण स्वीकृति का परमानंद है": प्रो. अमर सिंह

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           मोहिता जगदेव

    उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

योगराज कृष्ण की लोकहितैषी दृष्टि पर व्याख्यान 

"कृष्ण दर्शन लोकहितैषी सकारात्मक आध्यात्मिक दृष्टि है": प्रो. अमर सिंह 

"कृष्ण सार्वभौमिक करुणा, उदारता व दयालुता के प्रतिनिधि हैं ": प्रो. अमर सिंह 

 उग्र प्रभा समाचार, छिंदवाड़ा: 

      विश्वगीता प्रतिष्ठान छिन्दवाड़ा इकाई द्वारा स्थापना दिवस पर केशव साहू के निवास स्थान कृतिका रेजीडेंसी गांधीगंज छिंदवाड़ा में प्रबोधन कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गीता दर्शन:  योगराज कृष्ण की लोकहितैषी दृष्टि विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोलते हुए प्रो. अमर सिंह ने कहा कि लोककल्याणार्थ कृष्ण की सहज करुणा, उदारता और दयालुता ही उन्हें भगवतसत्ता का दर्जा दिलाती है। श्रीकृष्ण दर्शन सकारात्मक ध्यात्मिक सन्यास से जीवन की पूर्णता प्राप्त करने पर जोर देता है। कृष्ण पलायनवादी मानसिकता के पुरजोर विरोधी थे क्योंकि उनकी दृष्टि में सांसारिक जीवन की पूर्ण स्वीकार्यता ही परमानंद है।समिति के संयोजक नेमीचंद व्योम ने कहा कि कृष्णलीला जीवन के गहरे रहस्यों का का सरलतम उद्घाटन है, श्रीकृष्ण का गोवर्धन पर्वत को उठाना अभिमान त्याग का प्रतीकात्मक प्रकटीकरण है और गीता सकल विश्व के शुचि ग्रन्थों में से एक है। रणजीत सिंह परिहार ने कहा कि भक्त के लिए कृष्ण की शरण ही तमाम उलझनों का समाधान है। अनूपचंद त्रिपाठी ने कहा कि गीता समय के साथ गतिमान है और गीता के वर्ण वर्ण में ब्रह्म की मंत्रशक्ति का विमल वितान है। रमाकांत पांडे ने कहा कि कृष्ण दर्शन कर्तव्य विमुख किंकर्तव्यविमूढ़ के लिए मार्गदर्शी भूमिका निभाती है। साध्वी ऊषा शर्मा ने कहा कि कृष्ण की वाणी जन्मों के कलुष को मिटाकर सत्यं शिवम् सुंदरम के संदेश से संपूर्ण ब्रह्मांड की मनुष्यता को अनुप्राणित करती है। व्याख्यान में विश्वगीता प्रतिष्ठान से जुड़े सभी पदाधिकारी एवं गीता अनुरागी उपस्थित थे।

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