मोहिता जगदेव,उग्र प्रभा समाचार
योग चंचल मन को नियंत्रित करने का जरिया है": योगाचार्य यशस्कर त्रिपाठी
योग कार्य कुशलता से स्वयं का अनुसंधान है" प्रो. सिंह
योग स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाक विकसित करने की कला है": प्रो.सुदीश सूर्यवंशी
उग्र प्रभा समाचार चांद, छिंदवाडा: चांद कॉलेज में क्रीड़ा एवं राष्ट्रीय सेवा योजना विभाग द्वारा छात्राओं के लिए आयोजित एक माह के योग प्रशिक्षण में प्रशिक्षक छिंदवाड़ा के योगाचार्य यशस्कर त्रिपाठी ने छात्राओं को योग की महत्ता बताते हुए कहा कि योग मन की चंचलता को नियंत्रित करता है। मन पर नियंत्रण कर लेना ही मोक्ष का कारण बनता है।योग हमें सिखाता है और हमें स्वस्वीकृति के लिए किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। प्राचार्य प्रो. डॉ.अमर सिंह ने कहा कि हमें योग द्वारा स्वयं को समझना चाहिए। योग यथार्थ बोध की प्रक्रिया है, यह स्वयं के विकास का अनुसंधान है। योग कार्यों की कुशलता है। क्रीड़ाधिकारी अजय तेलंग ने कहा कि योग अशांति का इलाज है। हम सब अपने स्वभाव के विपरीत जीते हैं। जो नहीं लेना है उसे लेते रहते हैं। इससे छुटकारा योग से ही संभव है।
प्रो. सुदीश सूर्यवंशी ने कहा कि हम सब इच्छाएं पूरी करने में अधूरे रहते हैं। कमियां देखने की दृष्ठि में मानव को महारत हासिल है। योग स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाक विकसित करने की कला है। प्रो. सुरेखा तेलकर ने कहा कि योग संपूर्ण ब्रह्मांड तक फ़ैलने का जरिया है। धर्म व्यक्तिगत धारणाओं का विषय है। योग व्यष्टि से समष्टि की ओर की यात्रा है। प्रो . रक्षा उपश्याम ने कहा कि योग हमारी सभी उलझनों का समाधान है। प्रो. लक्ष्मण उइके ने कहा कि जिस रोग का कोई इलाज नहीं है वहां योग आराम देता है। प्रो . आर. के. पहाड़े ने कहा कि योग भोग की परेशानियों का निदान है। प्रो. सकर लाल बट्टी ने कहा कि तरक्की की ऐसी हवा चल रही है, खुश कोई नहीं खता चल रही है। हर तरफ है हैरान -बेचैन आदमी, किसी से भी पूछो दवा चल रही है।

