Type Here to Get Search Results !

चांद कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों पर कार्यशाला

0

      मोहिता जगदेव

 उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा

सही ढंग से जीवन जीने में अपार साहस लगता है": प्रो. पी. एन.सनेसर 

"स्वयं का स्वामी बनना ही शिक्षा के मूल में है": प्रो. राजेश कहार 

"विपरीत के विरुद्ध जूझने की क्षमता ही संतुलित स्वास्थ्य है": प्रो. रामकुमार उसरेठे 

"अपने वास्तविक स्वरूप में रहना ही मजबूत मानसिक स्वास्थ्य है": प्रो. योगेश अहिरवार 

" जो विचार हमारे अंदर जाएगा, वही फलेगा फूलेगा": प्रो.वैशाली गुप्ता 

" सभी नकारात्मक भावनाएं लक्ष्य पर फोकस की कमी से होती हैं": प्रो. चंद्रशेखर उसरेठे 


उग्र प्रभा समाचार,चांद छिंदवाड़ा: शासकीय महाविद्यालय चांद में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां और समाधान विषय पर आयोजित कार्यशाला में छात्रों को संबोधित करते हुए पी. जी. कॉलेज छिंदवाड़ा के प्रेरक वक्ता प्रो. पी. एन. सनेसर ने कहा कि जीवन में सही तरह से जीना बहुत साहस का काम होता है, इसे जीने का हर किसी के पास ढंग नहीं होता है। चौरई कॉलेज के प्रो. राजेश कहार ने कहा कि स्वयं का स्वामी बनना ही शिक्षा के मूल में है। साहस मानसिक कमजोरियों के हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा करता है। प्रो. चंद्रशेखर उसरेठे ने कहा कि उदासी, अकेलापन, अवसाद, निराशा, तनाव, क्रोध व चिड़चिड़ापन सब लक्ष्य पर फोकस की कमी के लिए सीधे जिम्मेदार होते हैं।  मानसिक स्वास्थ्य कोई मंजिल नहीं है, यह एक सतत विकसित होने वाली प्रक्रिया है। प्रो. रामकुमार उसरेठे ने कहा कि स्वस्थ मन वही होता है जो विपरीत के विरुद्ध जूझने की क्षमता प्रदान करे। खुद की अनदेखी करना खराब मानसिक स्वास्थ्य की निशानी है। प्रो. योगेश अहिरवार ने कहा कि अपने वास्तविक स्वरूप में रहना मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती का लक्षण है। अनावश्यक को नजरअंदाज करना ही बुद्धिमान होने की निशानी है। जीवन को ज्यादा गंभीरता से लेने वाले कभी इससे बाहर निकल कर जी नहीं पाते हैं। प्रो. वैशाली गुप्ता ने कहा कि हम जिस विचार को अपने अंदर बोते हैं, वही फलने फूलने लगता है। हम कल्पना में वास्तविकता से कहीं अधिक कष्ट भोगते हैं। इस ब्रह्मांड में कोई ऐसी साजिश अवश्य हो जिससे सभी खुद से प्रेम में शरीक हो जाएं। प्राचार्य प्रो अमर सिंह ने कहा कि खुद की फिक्र तनाव, दूसरों की फिक्र लगाव देती है। तनाव का अर्थ वह होना है, जो हम हैं ही नहीं। तनाव हमें ऐसे चाहता है कि जैसे हम ही इसका पहला प्यार हों। प्रो. रजनी कवरेती ने कहा कि अपनी क्षमताओं को पहचानना ही तनाव का डटकर मुकाबला करना है। क्षमता फलदायी व उत्पादक बने रहकर स्वयं व समुदाय में सार्थक योगदान के लिए ध्येयरत हो। कार्यशाला में लगभग 150 छात्रों ने सहभागिता सुनिश्चित की।

More Interesting Posts

Post a Comment

0 Comments

Footer

चैनल सब्सक्राइब करे

📺 हमारे YouTube चैनल को सब्सक्राइब करें


🔔 SUBSCRIBE NOW