मोहिता जगदेव
उग्र प्रभा समाचार,छिंदवाड़ा
कविता संग्रह 🔴 सारी ऑर्यभट्ट सर
शेफ़ाली शर्मा
शेफ़ाली की कविताएँ साहस और प्रतिरोध के साथ खड़ी होती हैं...
समीक्षक : विजय सिंह
कवि एवं संपादक
बंद टाकीज के सामने
जगदलपुर ( बस्तर)
युवा कवयित्री शेफाली की कविताएँ आपसे संवाद करती है बात करती है: विजय सिंह
उग्र प्रभा समाचार ,छिंदवाड़ा : म. प्र. के सबसे अधिक रचनात्मक शहरों में एक है छिन्दवाड़ा शहर । यहाँ की मिट्टी में रचना और रंगमंच के बीज हैं। जिसकी ख्याति दूर - दूर तक है। इस शहर ने नामचीन रचनाकार और सक्रिय संस्कृतिकर्मी दिये हैं। इसी शहर से युवा कवयित्री, एक्टिविस्ट शेफ़ाली शर्मा भी आती हैं। शहर की रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय शेफ़ाली शर्मा का पहला काव्य संग्रह " सारी ऑर्यभट्ट सर " अभी हाल के दिनों में छप कर आया है । इस संग्रह की कविताओं को पढ़कर यूं ही छोड़ा नहीं जा सकता है। क्योंकि यह कविताएँ आपसे संवाद करती हैं, बात करती हैं ।संग्रह की कुछ कविताओं की पंक्ति देखिए- सूरज कहता है / जब पृथ्वी मुझ से मुंह मोड़ रही हो / तब मुझे याद करना, मेरी बात करना /बात करना रौशनी की / जब हर तरफ़ अंधेरा, हो (गुनगुनाओ)
किताबें हथियार तो हैं / पर जान नहीं लेती / बचा लेती हैं जिंदा रहने के मायने / (किताबें डरा रही हैं) हम सारे बच्चे निकलना चाहते हैं / इस सन्नाटे से / हम सारे बच्चे हाथ बढ़ा रहे हैं / क्या कोई हाथ बढ़ रहा है हमारी तरफ ( आप मिले हैं ना मुझ से) इस मोहल्ले में सिक्ख / उस मोहल्ले में ईसाई हैं अल्पसंख्यक / इस देश में मुसलमान / उस देश में हिंदू है अल्पसंख्यक / मैं कैसे ना रोकूँ तुम्हारी नफ़रत / मैं जहाँ रहती हूँ / वहाँ मैं खुद हूँ, अल्पसंख्यक (अल्पसंख्यक)
गिनती, पहाड़ों और ढेर सी कहानियों की तरह / हमें यह भी कंठस्थ था / कि विपदा में ईश्वर आते हैं / मैंने चाहा न विपदा आए न ईश्वर( विपदा में ईश्वर) इस महत्वपूर्ण काव्य संग्रह में लगभग 80 कविताएँ संकलित हैं। इसे बोधि प्रकाशन ने छापा है । इसका मुख्य पृष्ठ बहुत कुछ कहता है । संग्रह की सभी कविताओं में एक लय है ,कहन के साथ आक्रोश के बीज भी ऐसे समय में जब देश अज़ीब से हालातों , संशय और सत्ता के कुरूप चेहरों के बीच उहोफोह में अपने आप को खोता जा रहा हो तब शेफ़ाली की कविताएँ साहस और विरोध के साथ खड़ी होती हैं. इस संग्रह की सभी कविताएँ संवेदना - जीवनदृष्टि के साथ उन्मादी, नफरती चेहरों को बेनकाब़ करती हैं।आज जब साहस से अपनी बात कहने के लिए, कोई तैयार नहीं है तब शेफ़ाली की कविताएँ पुरजोर ढंग से आवाज़ उठाती हैं। संग्रह की कविताएँ अपने समय के विभत्स चेहरे को सिर्फ उजागर नहीं करती बल्कि अपनी कविताओं के माध्यम से हमें कहने, बोलने, जूझने, संघर्ष करने, भाईचारा के साथ रहने, संवेदनशील समाज गढ़ने के लिए प्रेरित भी करती हैं । संग्रह की यह कविताएँ जैसे - एकमात्र, इंद्रधनुष, नफ़रतों की भाषा, शक है, ख़तरा, लकीरें धीरे - धीरे अब दीवार हो रही हैं, अल्पसंख्यक, राष्ट्र, कितना मनुष्य बचेगा हमारे अंदर? असभ्यताओं के बीच जीवन, धरती की वसीयत, सारी आर्यभट्ट सर जैसी महत्वपूर्ण कविताएँ पाठकों के मन में सिर्फ सवाल नहीं रखती बल्कि उन्हें सोचने के लिए बाध्य भी करती हैं कि हम आज कितने मनुष्य रह गये हैं? इस ठोस समय में जब हम अपने गुणा - भाग में अपने आप को खोते चले जा रहे हों तब शेफ़ाली " सारी ऑर्यभट्ट सर " जैसी महत्वपूर्ण कविता के माध्यम से देश के वर्तमान हालातों को सामने रखते हुए हमें जगाती हैं ।
इस कविता की कुछ पंक्ति देखिये..
कितनी रातें, कितनी आहें, कितने आसूँ, कितने तकिये / बोलो कौन गिनेगा? / कितने पौधे, कितने दाने, कितने फाकें बोलो कौन गिनेगा? / कितने घर, कितने उत्सव, कितनी खुशियाँ और उनमें कितना आधापन / बोलो कौन गिनेगा? बोलो कौन गिनेगा,... यह कविता अपने बुनावट में सहजता से अपने समय के विरोधाभास को सामने रखते हुए अपना आक्रोश व्यक्त करती है।यह आक्रोश कवयित्री शेफ़ाली के संग्रह की और अन्य कविताओं में भी दिखाई पड़ता है। आक्रोश और सवाल उठाती शेफ़ाली के इस संग्रह में इस तरह की अनेकानेक कविताएँ जड़ता को लांघने के लिए तत्पर दिखती हैं । जबकि शेफाली का यह पहला कविता संग्रह है । आज जब हर कोई कुछ भी लिख कर कवि/ कवयित्री होना चाहते हैं। ऐसे कवि होने की भेड़चाल से दूर कवयित्री शेफ़ाली शर्मा अपनी मिट्टी, जीवन अनुभव और अपने समय में अपनी कविताओं को विचार और प्रतिबध्दता के साथ सिरज रही हैं। यह बहुत बड़ी बात है ।मुझे विश्वास है यह कविताएँ दूर तक जायेंगी । इन कविताओं को पढ़ा जाना जरूरी है ।. समकालीन काव्य परिदृश्य में कवयित्री शेफ़ाली शर्मा की उपस्थिति महत्वपूर्ण है। कविता संग्रह " सारी ऑर्यभट्ट सर " की सारी कविताएँ उम्मीद की तरह हैं. .. .......
बधाई शेफ़ाली जी 🍃☘️
🟡 विजय सिंह

