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गीता /रामायण की जगह संविधान पढकर मनाई गई कमल मासाब की 22 वी पुण्यतिथि

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 गीता/रामायण की जगह संविधान पढकर मनाई गई कमल मासाब की 22वी पुण्यतिथि 



छिंदवाड़ा उग्र प्रभा समाचार - 16/092022 दिन शुक्रवार स्वर्गीय श्री महेन्द्र कुमार डेहरिया( कमल मासब) चांद की 22 वीं पुण्यतिथि उनकी छोटी पुत्री मोहिता मुकेश जगदेव छिंदवाड़ा के निवास पर बच्चों द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। एवं उनके सद्गुणों के बारे में बच्चो को बताया गया। बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी व स्वर्गीय श्री महेन्द्र कुमार डेहरिया(बाबुजी) के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करके बाबा साहेब के आदर्शों पर चलने वाले कमल मासब की यादों एवं उनके द्रारा किये गये कार्यों एवं विचारों को उपस्थित जनों के बीच साझा किया गया। समाज में प्रचलित छुआछूत, जातिवाद, ऊंच-नीच की परंपरा के घोर विरोधी रहें,निडरता से गलत को ग़लत सही को सही कहने वाले हंसमुख, मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे।क्षेत्रीय ही नही बल्कि दूसरे जिले में भी कमल मासाब के नाम से प्रसिद्ध और चर्चित थे।  उनकी 22 वीं पुण्यतिथि पर  परिवार के सदस्यों द्वारा पुरानी रूढ़िवादी परंपरा को तोड नई शुरुआत की गई। रामायण या गीता पढ़ने के बदले संविधान में बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी द्वारा दिए गए अधिकारों को पढ़ा गया। संविधान की उद्देशिका अभिषेक डेहरिया ने पढ़ा। बाबा साहेब के विचार भी पढे गए। "जयभीम 'उद्घोष के विषय में मोहिता जगदेव द्वारा पढ़ा गया- जयभीम शोषितों के घरों में उजाला बिखेरने वाली मशाल है। जयभीम का उद्घोष सहसा ही यह आभास देता है कि इस व्यक्ति या व्यक्ति समूह का स्वाभिमान जाग चुका है और वह अपनी हर प्रकार की गुलामी का बन्धन या तो पहले ही तोड़ चुका है या तोड़ने के लिए तत्पर है। बड़ी बेटी श्रीमती मंजुलता डेहरिया ने अपने पापा का जीवन परिचय सुनाया। संविधान निर्माता, महामानव, भारत रत्न बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर जी  व स्वर्गीय श्री महेन्द्र कुमार डेहरिया को शत् शत् नमन करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।समाज के लोगों में संविधान पढ़ने की जागरूकता और संविधान में बाबा साहेब द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रति सजग रहने के उद्देश्य को लेकर स्वर्गीय कमल मासब के बच्चों द्वारा नई शुरुआत की गई। इसके पूर्व भी परिवार द्वारा  श्रीमती इंदुबाला डेहरिया के दिवंगत  (21/04/2021) होने पर उनके फूलों को इलाहाबाद नहीं ले जाया गया, मां की इच्छानुसार उन्हें चांद की ही कुलबहरा नदी में प्रवाहित किया गया था।गंगापूजन न करके सिर्फ परिवार के सदस्यों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गई थी।



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