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27% ओबीसी आरक्षण की दास्ताना क्या है समझे एडवोकेट देवेंद्र वर्मा सें

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27%ओबीसी आरक्षण मसले को समझे


👉 मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री कमलनाथ सरकार द्वारा अन्य पिछड़े वर्ग को 14 से बढ़ाकर 27 परसेंट आरक्षण का अध्यादेश दिनांक 8 मार्च 2019 को जारी किया तथा दिनांक 14 अगस्त 2019 को विधानसभा से संशोधन अधिनियम पारित कर पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दिया गया दिया गया ।

👉 मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में 27% आरक्षण की वैधता को चुनोती देने वाली पहली याचिका क्रमांक 5901/2019 दाखिल हुए जिसमे मेडीकल की चार छात्राए है इस याचिका में  प्रमुख मांग यह थी कि पीजी नीट परीक्षा 2019-20, में अन्य पिछड़े वर्ग को 27% आरक्षण लागू ना किया जाए,  उक्त याचिका मैं दिनांक 19 मार्च 2019 को हाई कोर्ट जबलपुर द्वारा प्रारंभिक सुनवाई की गई तथा उच्च न्यायालय द्वारा पी जी  काउंसलिंग में 14% आरक्षण देने का आदेश दिया यहां यह उल्लेखनीय है कि पीजी नीट की काउंसलिंग 14% के ही हिसाब से  की जा रही थी ना कि 27% के अर्थात इस स्थगन आदेश का अन्य पिछड़े वर्ग के आरक्षण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, तथा हाईकोर्ट ने उक्त आदेश में यह भी उल्लेख किया था कि यह आदेश सिर्फ याचिका की विषय वस्तु पर ही लागू होगा ।

👉  हाई कोर्ट जबलपुर में दायर अन्य याचिकाओ में शंशोधन अधिनियम 2019 को चुनोती दी गई तथा उक्त याचिका    में पीएससी द्वारा मेडीकल को भी चुनोती दी गई थी जो कि  27% आरक्षण के हिसाब से की जा रही थी जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 31 जनवरी 2020 को अंतरिम आदेश पारित कर भर्ती  की प्रक्रिया कंटिन्यू रखी जाने का आदेश पारित किया गया लेकिन  कोर्ट की परमिशन के बिना नियुक्ति पत्र जारी न किए जाएं का आदेश दिया गया ।

👉31 जनवरी 2020 के आदेश को मॉडिफाइड कराने के लिए भाजपा सरकार की ओर से हाईकोर्ट में लिखित में आवेदन दिया गया कि अन्य पिछड़े वर्ग का बढ़ा हुआ 13% आरक्षण होल्ड करने की अनुमति दी जाए तथा psc द्वारा की जा रहे मेडिकल क्लास टू ऑफिसर की भर्ती 14% आरक्षण के मान से ही करने की आज्ञा दी जाए उक्त आवेदन पर हाई कोर्ट द्वारा दिनांक 13 जुलाई 2021 को तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार की इच्छा अनुसार आदेश पारित कर दिया गया अर्थात तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ओबीसी का 13% आरक्षण कोर्ट के माध्यम से उक्त भर्ती में होल्ड करवा दिया गया जिसके विरोध में मध्यप्रदेश में छात्रों द्वारा तथा विपक्ष द्वारा विधानसभा में हंगामा किया गया ।

👉: उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पिछड़ा वर्ग के अधिवक्ताओं द्वारा की जा रही मुस्तैदी से पैरवी के कारण आज दिनांक तक कांग्रेसी सरकार द्वारा संशोधन अधिनियम 2019 जिसके मुताबिक अन्य पिछड़े वर्ग को 27% आरक्षण की व्यवस्था की गई है पर स्टे नहीं हुआ है, फिर भी मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा ओबीसी के 27% आरक्षण को अपने कार्यकाल में लागू नहीं किया गया इसका प्रमुख कारण यह है कि तत्कालीन महाधिवक्ता द्वारा दिनांक 18/8/ 2020 को गलत अभिमत देकर कहा गया कि अन्य पिछड़ा वर्ग का 13% आरक्षण हाई कोर्ट से स्टे होने के कारण लागू न किया जाए उक्त अभीमत 100 फ़ीसदी गलत था जिस का विरोध किया गया तब महाधिवक्ता द्वारा ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन के अधिवक्ताओं के खुले विरोध के कारण दिनांक 26 अगस्त 2021 को महाधिवक्ता द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग को अभिमत दिया गया कि संशोधन अधिनियम 2019 पर हाईकोर्ट का स्थगन नहीं है इसलिए तीन विषयों को छोड़कर, पीजी नीट, psc मेडिकल क्लास 2 तथा शिक्षक भर्ती के पांच विषय को छोड़कर शेष समस्त विभागों में 27% आरक्षण लागू किया जाए उक्त संबंध में दिनांक 2 सितंबर 2021 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा एक पत्र जारी किया गया फिर भी 27% आरक्षण लागू नहीं किया गया तथा शिक्षकों की भर्ती  14% आरक्षण ही दिया गया एवं अन्य भर्तियों में भी नहीं दिया जा रहा है

👉 नए महाधिवक्ता की नियुक्ति के बाद हाई कोर्ट जबलपुर में ओबीसी के आरक्षण पर 5 स्थगन आदेश जारी हो चुके हैं उक्त किसी भी सुनवाई पर महाधिवक्ता उपस्थित नहीं हुए बल्कि उक्त प्रकरणों की केस की  फाइल तक उन्होंने अपने ऑफिस में रखली जो सरकारी अधिवक्ता सुनवाई दिनाँक 15/11/21 को खड़े हुए उनके पास उक्त प्रकरण की फाइल तक नहीं थी ।

👉 ओबीसी के 27% आरक्षण के प्रकरणों पर माननीय कमलनाथ जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अभिषेक मनु सिंघवी एवं इंदिरा जयसिंह को नियुक्त किया गया जो नियमित रूप से पैरवी कर रहे हैं तथा आज तक स्थगन नही हुआ ।

👉आरक्षण के समस्त प्रकरणों की अंतिम सुनवाई के लिए हाईकोर्ट द्वारा 6 दिसंबर 2021 का आदेश किया गया था उक्त प्रकरण दिनांक 16 दिसंबर 2021 को सुनवाई पर आए लेकिन शासन की ओर से कोई भी अधिवक्ता उपस्थित नहीं हुआ तथा उक्त समस्त प्रकरण अनिश्चितकाल के लिए एडजर्न हो चुके हैं

👉: मध्य प्रदेश सरकार अन्य पिछड़े वर्गों को 27% आरक्षण देना नहीं चाहती यह स्पष्ट हो चुका है जिसका निरंतर रूप से प्रदेश में अन्य पिछड़े वर्ग के युवा विरोध कर रहे हैं जगह-जगह धरना प्रदर्शन कर रहे हैं

👉 भाजपा द्वारा पंचायतों में भी ओबीसी आरक्षण को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा बिना रोटेशन के चुनाव की अधिसूचना जारी करवाई तथा सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई दिनांक 17 दिसंबर 2021 को मध्यप्रदेश शासन की ओर से उपस्थित एवं पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत नहीं कराया की याचिका की विषय वस्तु रोटेशन को लेकर के हैं और उन्होंने जानबूझकर पंचायत के त्रिस्तरीय चुनाव चलो मैं ओबीसी का आरक्षण समाप्त कराया गया है जिसके विरोध में संपूर्ण मध्यप्रदेश का पिछड़ा वर्ग व्यथित है , 

एडवोकेट देवेंद्र वर्मा अध्यक्ष छिंदवाड़ा सिवनी बैतूल ओबीसी एडवोकेट वेलफेयर एसोसिएशन मध्य प्रदेश

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